Thursday, December 31, 2020

क्या मेरी वाहन दुर्घटना से मौत होगी ?

 वाहन दुर्घटना से मौत होने के कुछ योग इस प्रकार है । 

(1) यदि षष्ट भाव मे  ( चतुर्थेश  + शनि ) की युति है तो  वाहन से मौत होने का योग है । 

(2) यदि सूर्य दशम भाव मे और  मंगल चतुर्थ भाव मे स्थित हो तो भी वाहन से  मौत होने का योग है । 

(3) यदि जातक की कुंडली मे  ( अष्टमेश व चतुर्थेश ) की युति है तो भी वाहन दुर्घटना मे मौत का योग बनता है । 

(4) यदि शनि अष्टम  भाव मे पाप ग्रहो से युक्त है या पाप ग्रहो की द्रष्टि मे हो और लग्नेश दु : स्थान  मे हो या हीन बली

 हो  तो भी  वाहन दुर्घटना मे मौत हो सकती है । 

Wednesday, December 16, 2020

आखिर चर्म रोग दाद, खाज, खुजली क्यो होता है ?

 ज्योतिष के अनुसार  चर्म रोग ,दाद , खाज , खुजली  होने के ज्योतिषीय  योग निम्नलिखित है । 


(1) लग्न मे स्थित सूर्य पाप ग्रह से द्रष्ट या युक्ति संबंध होने पर दाद रोग देता है । 

(2) जलतत्व  राशि मे स्थित चंद्रमा , यदि जलतत्व राशि के शनि से द्रष्टि मे हो तो खुजली देता है । 

(3) यदि कुंडली मे तीसरे भाव मे ( शनि + मंगल ) की युति खाज , खुजली  देती है । 

(4) यदि कुंडली मे ( कोई भी पापग्रह + चंद्रमा ) की युति नवम भाव मे हो तो खाज ,खुजली  जैसे रोग को जन्म देती है ,यदि ये चंद्रमा पाप ग्रह की द्रष्टि मे भी हो तो ये योग ओर भी प्रबल हो जाता है । 

Saturday, December 12, 2020

ज्योतिष के अनुसार हिस्टीरिया रोग क्यो होता है ?

 हिस्टीरिया -  हिस्टीरिया  रोग अधिकतर भावुक व कोमल स्वभाव की स्त्रियो को होता है /असंतुष्ट संभोग इच्छा  या हट करके कामेच्छा का दमन हिस्टीरिया जैसे रोग का कारण होता है /कभी कभी चिंता, दुख, गर्भाशय  या मासिक धर्म  की गड़बड़ी या अचानक मानसिक आघात से भी यह रोग हो जाता है /इसमे कोई शक नही है ये एक मानसिक रोग है /इसकी   सबसे  मुख्य   पहचान है बेहोशी / इस रोग के रोगी  हाथ पैर पटकना ,शरीर का अकड़ जाना या कभी कभी मुह से झाग का आना /  इस रोग के होने की संभावना के योग निम्न  है ---

(1)  बुध व चंद्रमा  केंद्र मे स्थित  होकर  शनि , राहू या मंगल से द्रष्टि  मे हो या फिर युति सबंध मे हो तो इस रोग की संभावना बढ़ जाती है /

(2)   यदि बुध व चंद्रमा  केंद्र मे स्थित होकर ,शनि , मंगल व राहू से कोई भी संबंध  करे तथा सप्तम भाव भी पाप ग्रह से युक्त या द्रष्टि मे हो तो  जातक इस रोग से पीड़ित हो जाता है /


(3)  यदि सप्तम भाव , सप्तमेश  ओर कारक ग्रह शुक्र , पाप  ग्रह से पीड़ित होकर त्रिक स्थान  से कोई भी संबंध करे तो इस रोग के होने की संभवना बढ़ जाती है /

Thursday, December 10, 2020

क्या यश , धन , पद मिलेगा ?

 निम्न योगो  मे नोकरी , पदवी , धन ,यश  आदि इनके जैसा प्रश्न हो तो सफलता मिलती है -


(1)   बुध , गुरु  व  शुक्र मीन राशि मे हो तो सफलता मिलती है  /


(2)  बुध , शुक्र व चंद्रमा  शीर्षो उदय  राशियो मे हो तो भी सफलता मिलती  है /


(3)  यदि लग्नेश  व चंद्रमा दशम भाव मे स्थित हो तो भी सफलता मिलती है /


(4)  यदि दशमेश लग्न मे ओर  लग्नेश  दशम मे हो तो भी सफलता मिलती है /

Saturday, December 5, 2020

क्या मेरे पुण्य बलवान है

इन योगो  मे मनुष्य द्वारा किए गए अर्जित पुण्य बलवान होते है -


(1)  केतू का बुध ग्रह या  गुरु ग्रह के साथ कुछ न कुछ योग हो /


(2) लग्न के दोनों ओर शुभ ग्रह  होने चाहिए  ओर अष्टम भाव मे कोई भी पाप  ग्रह नही होना चाहिए /


(3)  नवमेश  5, 10 भावो  मे शुभ राशियो मे होना चाहिए /


(4)  नवमेश अपनी उच्च राशि मे  1, 3 भावो मे  होना चाहिए /


(5)  लग्नेश या पंचमेश के साथ नवमेश का कुछ न  कुछ  संबंध जरूर होना चाहिए /

Sunday, November 15, 2020

भाग्य शाली रत्न का चयन कैसे करे -

मैने अपने ऊपर सभी रत्नो का  प्रयोग किया ओर उनका अच्छा बुरा दोनो ही तरह का परिणाम अनुभव किया ,अन्त मे  मै इस निर्णय पर पहुँचा हू की रतन कभी  ग्रह के सकारत्मक या नकरात्मक  को ना देखकर पहने, क्योकी यदि ग्रह आपकी कुंडली के अनुसार सकारत्मक है तो ये जरुरी नही की वो परिणाम अच्छे ही देगा ।परिणाम निर्भर करता है महादशा स्वामी पर,क्योकी मैने खुद अनुभव किया है की महादशा स्वामी 70% परिणाम देता है ओर 20%परिणाम अन्तर्दशा स्वामी ओर 5% परिणाम प्र्त्यनतर दशा स्वामी ओर 5% सूक्ष्म दशा स्वामी परिणाम देता है। अब बात अति है की भाग्य रत्न का चयन कैसे करे सबसे पहले महादशा नाथ को देखो की वो किन किन भावो (घरो) का कार्येश है तो जिन भावो से  दशा स्वामी संबंद्ध करता है ओर वो भाव अच्छे परिणाम देने वाले है तो दशा स्वामी का रत्न धारण करे निश्चय ही आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे ओर यदि दशा नाथ अच्छे भावो का कार्येश नही है तो महा दशा नाथ को छोडकर  फिर ये देखो की  नक्षत्र के माध्यम से  कौन सा ग्रह आया है यदि ये ग्रह भी अच्छे भावो  का कार्येश नही  है तो इसे भी छोड दो फिर उप नक्षत्र स्वामी को देखो यदि ये भी अच्छे भाव का कार्येश नही है छोड दो इसे भी, फिर दृष्टी देखो यदि ये भी सही नही तो युति देखो  कुल मिलाकर निर्णय ये लिया गया  जो ग्रह महादशा  नाथ से सम्बन्धित हो ओर अच्छे भावो का कार्येश हो तो उसी का रत्न धारण करे निश्चय ही आपको उसके सकारत्मक परिणाम मिलेंगे ।क्योकी परिणाम सभी ग्रह देते है मगर अपनी अपनी भुक्ति,अन्तरा  में  लेकिन मुख्य परिणाम महादशा नाथ पर निर्भर करता है । कुछ लोग कुंडली मे ग्रह की स्थितियों पर विचार करते है ओर रत्न धारण करा देते है लेकिन इस ग्रह का महादशा नाथ से कोई संबंद्ध नही है तो परिणाम नही मिलेगा फिर हम कहते है की रत्न से कुछ नही होता ये तो पत्थर है,ये पत्थर नही है 100% परिणाम देते है बस इनका चयनकर्ता सही ओर अनुभवी ज्योतिषी होना चाहिए।।

Sunday, September 13, 2020

कई कामो मे से कौन सा काम बनेगा ?

कौन सा काम बनेगा तो उसके निम्न योग है-
(1) बलवान लग्नेश केन्द्र मे हो तो पहले कहा गया काम बनेगा।

(2) यदि लग्नेश अन्य किसी भी भाव मे हो तो बाद मे कहे गये कार्यों  मे से कोई बनेगा ।

(3)पहला प्रश्न लग्न से,  दूसरा  चंद्रमा से,  तीसरा सूर्य से,  चौथा गुरु से,  पांचवा  शुक्र से, या शुक्र,मंगल,बुध मे से जो सर्वबली  हो उससे देखना  चाहिए।

(4) शनि से अन्त मे कहा गया प्रश्न देखे।

Wednesday, August 26, 2020

क्या मुझ पर कोई जादू या टोना किया गया है --

यदि प्रश्न कुंडली  मे निम्न योग बनते है तो तान्त्रिक प्रहार किया गया है ।
(1) मंगल व लग्नेश केंद्र मे हो और षष्ठेश  लग्न मे गया हो ।
(2) षष्ठेश  केंद्र मे हो और लग्न को मंगल देखे तो भी किया है ।
(3)लग्न मे चंद्रमा  को षष्ठेश  दृष्टि सम्बंध रखता हो ।
(4) द्विस्वभाव  या स्थिर राशि का राहु नवम भाव  मे स्थित  हो  तो तान्त्रिक प्रहार किया गया है ।

Sunday, August 9, 2020

क्या मैं सदा ही किरायेदार रहूंगा-

किराये के मकान  मे रहना या अपना मकान  न बन पाने के ये दो योग मुख्य हैं ।

(1) षष्ठेश यदि सूर्य  या राहु के साथ व्यय  भाव मे हो तो भी सारा जीवन किराये के मकान  मे ही व्यतीत होता है ।

(2) चन्द्रमा से अष्ठम  मे कोई ग्रह हो और चंद्रमा  से 2,5 भावो मे कही भी गुरु हो तो भी किराये पर रहता है ।।

Thursday, July 23, 2020

ह्रदय रोग के ज्योतिषीय कारण-

ह्रदय  रोग के ज्योतिषीय कारण  निम्न है 

(1) मंगल+गुरु + शनि की युति चतुर्थ भाव मे हो।
(2) मंगल व केतु की युति  चतुर्थ भाव मे हो।
(3) गुरु + शनि + षष्ठेश  की युति चतुर्थ भाव मे हो ।
(4) गुरु चतुर्थ भाव मे हो ,सूर्य  तथा मंगल से द्रष्टि  या युति सम्बंध हो।
(5)शनि चतुर्थ भाव मे तथा राहु 12वे भाव मे हो ।
(6) 6,8,12 भाव मे ( सूर्य + शनि ) की युति हो।
(7) सूर्य  + शनि की युति छठे भाव मे,पाप दृष्ट हो या पापयुक्त हो तथा बुध लग्न मे स्थित  हो ।
(8) चंद्रमा +राहु की युति 7वे भाव मे हो और शनि केंद्र  भाव मे स्थित हो ।
(9) सूर्य  व चंद्रमा  की युति सिंह या कर्क राशि मे हो तो भी इस रोग के होने की संभावना  होती है ।

ह्रदय  रोग के कारकत्व निम्न है-
ग्रह- सूर्य,चंद्रमा  और मंगल
भाव- पंचम और चतुर्थ
राशि- कर्क    ।

Saturday, July 18, 2020

प्रश्न के अनुसार वैवाहिक सुख कम या विवाह भंग होने के योग-

(1) सप्तमेश  6,8,12 मे हो।

(2)  प्रश्न  के समय  गुरु अपनी नीच  राशि मे हो ।
(3) सप्तमेश कही भी नीच  राशि में  हो ।
(4) शुक्र व मंगल की युति 6,8,12 मे हो ।

(5) शुक्र व मंगल की युति हो और इनमे से कोई सा एक अपनी नीच  राशि मे हो तो भी वैवाहिक  सुख मे कमी  होती है।

Wednesday, July 8, 2020

मंगल की शुभ व अशुभ दशा का परिणाम-

(1) मंगल की शुभ दशा--
प्रशासन और व्यवस्था,अग्नि से सम्बंधित कार्य,साहस,कठिन या जोखिम भरे कार्य,विष या पीडा का उपचार या किसी भी समस्या का निदान कर धन,मान व पद प्रतिष्ठा दिलाती  है ।भूमि से सम्बन्धित  कार्य,तांबा या सोने की वस्तुएं,मसालेदार  खाध पदार्थ  के  उत्पादन,बेचने  या प्रयोग  करने से जातक धन लाभ पाता  है ।

(2) मंगल की अशुभ दशा--
मंगल की अशुभ दशा मे छोटे भाई बहन से विरोध,पत्नि व पुत्र से अनबन ,भू संपदा  की हानि,मांसपेशियो मे दिक्कत,लडाई झगडो मे चोट,दुश्मन के कारण  अपमान व कार्य मे बाधा,अधर्म मे रुचि,रक्त दोष,कभी कभी गुरूजनो की आज्ञा  का उलन्घन करने से शरीर की पीड़ा व मानसिक पीड़ा  को पाता  है।

Monday, July 6, 2020

चन्द्रमा की शुभ व अशुभ दशा का परिणाम-

(1) चंद्रमा  की शुभ दशा--
चंद्रमा की शुभ दशा मे मन खुश रहता  है। धन ,मान व सुख की अधिकता होती है ।गुरु व देवता  का उपासक  होता है तथा पत्नि  व पुत्र की और से सुखी रहता है ।

(2) चंद्रमा  की अशुभ दशा--
चंद्रमा  की अशुभ  दशा  मे मनोव्यथा,घर मे क्लेश, धन का नाश,आलस्य ,उच्च अधिकारियो  से वैर विरोध या झगडे आदि।
कभी- कभी वमन या अपच रोग भी दे दिया करती है ।

Monday, June 29, 2020

सूर्य की शुभ व अशुभ दशा का परिणाम-

(1) सूर्य की शुभ दशा--
कभी क्रूर या कठोर कार्य ,दवाई या सरकार  के सहयोग  से   अथवा संघर्ष स्पर्धा  से धन मान  व यश देती है ।कोई कोई जातक तो वन या पर्वत मे भ्रमण  करता है ।महनती व उधोगशील होता है।

(2) सूर्य की अशुभ दशा--
 अपमान,अपयश, असफलता,स्त्री ,पुत्र व भाईयो से विवाद, अग्नि से डर, ज्वर व पित्त  जन्य कष्ट, धन हानि,आंखो मे पीडा देती है । कभी कभी तो पिता या गुरूजन का वियोग भी कष्ट देता है ।

Sunday, June 21, 2020

क्या मंगेतर या गर्लफ्रेंड अछूती है?--

 (1) लग्नेश व चंद्रमा  चर राशि मे हो।

(2) केंद्र  मे बुध,शुक्र  चंद्र्मा से दृष्ट  हो ।

(3) शुक्र  व बुध वृश्चिक राशि मे हो।

(4) लग्न मे चंद्रमा  व शनि हो या लग्न चंद्रमा  द्विस्वभाव  राशि मे हो ।

इन योगो मे यदि कोई भी योग प्रश्न  कुंडली मे बनता  है तो पहले  ही किसी अन्य पुरुष से संगम हो चुका है ।

Saturday, June 13, 2020

स्त्री गर्भवती है या नही--

गर्भ है या नही ?इस प्रश्न  का निर्णय  निम्न योगो के आधार  पर करना  चाहिए।

(1) प्रश्नकुंडली  मे लग्न और 5वे भाव मे शुभ ग्रह हो तो स्त्री गर्भवती  होती है।

(2) लग्न,पंचम और 11 वे भाव मे शुभ ग्रह हो तो भी स्त्री गर्भवती  होती है ।

(3)लग्नेश  व चन्द्रमा 5 वे भाव मे हो या फिर ये दोनो लग्न को देखते हो तो भी स्त्री गर्भवती  होती है ।

(4) पंचमेश  वक्री,नीच राशि का हो तो स्त्री गर्भवती  नही होती  है ।

Sunday, June 7, 2020

हनीमून पर कैसा माहौल रहेगा-

हनीमून  पर जाने के बाद कैसा माहौल रहेगा ऐसा प्रश्न होने पर  यदि निम्न योगो मे हसी,खुशी के साथ  समय  बितेगा ।

(1) केंद्र मे चंद्रमा  की शुभ ग्रहो से युति  हो या शुभ ग्रहो से दृष्ट हो ।

(2) लग्न मे गुरु,सप्तम मे शुक्र,और चतुर्थ मे चंद्र्मा हो ।

(3) यदि चंद्रमा  कमजोर या क्रूर ग्रहो से दृष्ट हो तो माहौल कुछ कसैला  सा हो जाता है।
 
(4) यदि चंद्रमा से मिलेजुले ग्रहो का योग हो तो  माहौल मिला जुला ही रह्ता है।

Wednesday, June 3, 2020

दशम भाव के मुख्य विषय -

दशम भाव के मुख्य विषय इस प्रकार है --

1- खेलकूद  मे सफलता ।

2- राज्य  का सुख  अधिकार प्राप्ति ।

3- उत्पादन से लाभ, सम्मान ।

4- हवाई दुर्घटना , वर्षा , तूफान ।

5- व्यापार  मे  स्थायी सफलता भी दशम भाव से ही देखी जाती है ।



Saturday, May 30, 2020

क्या विदेश गया व्यक्ति कष्ट मे है--

(1) यदि शुभ ग्रह 6,8,और 12वे भाव मे निर्बल  होकर पाप ग्रहो से दृष्ट हो तथा सूर्य और चंद्रमा लग्न मे हो तो प्रश्न  के समय तक विदेश मे गया व्यक्ति  मर चुका होता है।

(2)नवम भाव मे क्रूर  ग्रहो से दृष्टी या युति सम्बंध मे शनि हो तो  प्रवासी रोग ग्रस्त  हित है और यदि ऐसा शनि अष्टम भाव मे हो तो प्रवासी  की मृत्यु  होती है।

(3) चतुर्थ भाव मे नीचराशि मे स्थित वक्री ग्रह के साथ चंद्र्मा इत्थशाल करता  हो और शुभ ग्रहो की द्रष्टि  ना पड़ रही हो तो प्रवासी  विदेश मे मर जाता है।

Friday, May 29, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या कोई अंगनाश या आपरेशन होगा--

अंगनाश या आपरेशन  के योग निम्न है--

(1) दशम मे बुध,शनि व राहु हो ।

(2) लग्न मे वक्री ग्रह हो और लग्नेश स्वयं  भी वक्री हो ।

(3) किसी भी लग्न मे सूर्य,मंगल और शनि षष्ठ  या बारहवें  भाव मे हो ।

(4) अष्टम  मे चंद्रमा व शनि साथ हो ।

इनमे से प्रश्न कुंडली मे कोई भी योग हो तो अंगनाश या आपरेशन  जरुर होता है ।




Thursday, May 28, 2020

विवाह न होने के योग --

प्रश्न  के अनुसार विवाह न होने के योग निम्न है---

(1) प्रश्न  लग्न से सप्तम भाव मे राहु हो और उस पर शुभ  ग्रहो की दृष्टि  हो।

(2) केंद्र,त्रिकोण या अष्टम भाव मे चंद्रमा और पाप ग्रह हो।

(3) सप्तमेश अष्टम भाव मे पाप ग्रहो से दृष्ट हो ।

(4) लग्न और सप्तम भाव मे पाप ग्रह हो तो भी विवाह नही होता है ।

       

Wednesday, May 27, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरी मंगेतर कैसी है--

मंगेतर कैसी है जानने के योग निम्न है --

(1) केंद्र त्रिकोण या लाभ मे गुरु ,बुध व अन्य शुभ ग्रह हो तो होने वाली पत्नी  भाग्यशालिनी  होती है।

(2) पंचम मे पाप ग्रह हो तो धन व सन्तान की हानि करेगी ।

(3) 1,7,8 मे पाप ग्रह हो तो मंगेतर चरित्रहीन  है।

(4) 6,9 भाव मे चंद्र हो तो दोनो मे से किसी को भी जीवन  भय  सम्भव  है ।

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कुंडली  विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar

Sunday, May 24, 2020

चोरी हुआ सामान मिलने के योग-

यदि प्रश्न  कुंडली मे निम्न योगो मे से कोई भी एक योग हो तो चोरी  हुआ सामान  मिल जाता है --

(1)  लग्नेश सप्तम मे और सप्तमेश लग्न  मे हो तो भी वस्तु मिल जाती है।

(2) लग्नेश और दशमेश  पाप ग्रहो से  दृष्ट  या युक्त हो  तो भी मिल जाता है ।

(3) लग्नेश और सप्तमेश लग्न, धन या लाभ स्थान मे हो तो भी वस्तु  मिल जाती है।

(4) द्वितीयेश और अष्टमेश  पर चतुर्थेश  की दृष्टि  हो तो भी वस्तु  मिल जाती है ।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar 

Saturday, May 23, 2020

कार्य सिद्धि के योग--

 यदि लग्नेश एवं  कार्येश  का लग्न एवं कार्य  भाव से सम्बंध हो तो कार्य  मे सफलता मिलती है ।

कार्य  सिद्धि  के योग निम्न है --

(1) लग्नेश लग्न को और कार्येश  कार्य  भाव को देखता  हो तो कार्य  सिद्घ  होता है ।

(2) लग्नेश कार्य  भाव को और कार्येश  लग्न को देखता हो तो भी कार्य  सिद्घ  होता है ।

(3) लग्नेश और कार्येश  एक दूसरे  को देखते हो तो भी कार्य  सिद्घ  होता है ।

(4) लग्नेश और कार्येश  दोनो लग्न मे बैठे हो तो भी कार्य  सिद्घ   होता है ।

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Friday, May 22, 2020

रोगी के ठीक होने के योग -

रोगी ठीक होने के योग निम्नलिखित है --

(1)स्वराशि  का चंद्रमा चतुर्थ या दशम स्थान में  हो तो रोगी ठीक हो जाता है।

(2) एक भी शुभग्रह  बलवान  होकर लग्न मे स्थित हो  तो भी रोगी ठीक हो जाता है।

(3) शुभ ग्रह लग्नेश बलवान होकर केंद्र ,त्रिकोण  या उच्च  राशि मे हो  तो भी रोगी ठीक हो जाता है ।

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Thursday, May 21, 2020

रोगो के वर्ग ,ग्रह व राशियाँ--

(1) रोगों  के तीन वर्ग होते है--

(अ ) पित्त  (ब) वात  (स) कफ 

(2) पित्त प्रधान ग्रह व राशिया  निम्न है- 

(अ ) सूर्य व मंगल ग्रहो का सम्बंध पित्त दोष से माना गया है ।

(ब) मेष, सिंह व धनु राशियो का सम्बंध पित्त दोष से माना गया है।

(3) वात प्रधान ग्रह व राशिया--

(अ) शनि,राहु व केतु को वात प्रधान ग्रह माना गया है।

(ब) वृष, कन्या व मकर राशियो का सम्बंध वात दोष से माना गया है ।

(3) कफ प्रधान ग्रह व राशिया--

(अ) चंद्रमा,शुक्र व गुरु को कफ प्रधान ग्रह माना गया है ।

(ब) कर्क,वृश्चिक  व मीन राशियो को कफ दोष बढ़ाने वाली राशि माना गया है ।

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Wednesday, May 20, 2020

शैशव काल मे मृत्यु के योग--

शैशव काल मे मृत्यु  के योग निम्न है-- 
(1) पंचमेश,मंगल या राहु से युक्त होकर  त्रिक स्थान  मे हो ।

(2)पंचम और सप्तम भाव मे बली पाप ग्रह हो।

(3)पंचमेश तथा गुरु की अष्टम  भाव मे युति हो तो भी शैशव काल मे मृत्यु योग बनता  है।

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Tuesday, May 19, 2020

मुकदमे के लिये यात्रा और विजय पराजय सम्बन्धी प्रश्न के योग--

 यदि किसी जातक का मुकदमा  चल रहा हो और वह पैशी के लिये जा रहा हो तो  प्रश्न  कुंडली  से निम्न विचार करे--

(1) यदि प्रश्न  लग्न स्थिर हो और लग्न मे पापग्रह हो तो  भी यात्रा करने वाले  की विजय होती है ।

(2)  यदि चर लग्न हो और लग्न मे शुभग्रह  हो तो भी यात्रा करने  वाले  की विजय होती है।

(3) यदि चर लग्न मे पापग्रह  हो तो यात्रा करने  वाले  पराजय होती है ।

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Monday, May 18, 2020

ग्रह और उनके कारकत्व---

 प्रथम भाव -- सूर्य 
द्वितीय  भाव-- गुरु
 तृतीय  भाव-- मंगल
चतुर्थ भाव-- चंद्र  व बुध 
पंचम भाव-- गुरु 
षष्ठ भाव-- शनि व मंगल 
सप्तम भाव --  शुक्र
अष्टम भाव -- शनि 
नवम भाव -- सूर्य  व गुरु 
दशम भाव-- सूर्य, बुध,गुरु,शनि
एकादश भाव-- गुरु 
द्वादश  भाव-- शनि 

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कुंडली विशेषज्ञ -- Astroplus Durvesh  Kumar 

Sunday, May 17, 2020

सप्तवारो मे जन्मे जातक का स्वभाव--

(1) रविवार --- परम चतुर,तेजस्वी, दानी और उत्साही ।

(2) सोमवार--बुद्धिमान, शांत  और धनी ।

(3) मंगलवार-- कुटिल बुद्धि ,जननायक ।

(4) बुधवार-- प्रियवक्ता, पण्डित, बुद्धिमान, सुन्दर और सम्पत्ति युक्त।

(5) गुरुवार-- विवेकी, लोगो मे मान्य, अध्यापक   होता है ।

(6) शुक्रवार-- बुद्धिमान, वक्ता और चंचल ।

(7)शनिवार-- क्रूर, दुष्ट स्वभाव ,नीच ।

* दिन का जन्म  होने पर -- अधिक पुत्रवाला भोगी, बुद्धिमान  और सुन्दर ।

* रात्रि का जन्म होने पर -- मित  भाषी,अधिक कामी, कुटिल ह्रदय ,और गुप्त पाप करने वाला ।

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Saturday, May 16, 2020

दशा कितने प्रकार की होती है--

कुल दशा 32 प्रकार  की होती है परन्तु  महर्षियो ने विशोंतरी दशा को मुख्य दशा माना है ।और कलयुग मे विशोन्तरी  दशा को ही मुख्य माना गया है । दशाओ के नाम निम्न है--
(1) विशोंत्तरी  (2) अष्टोत्तरी (3) षोडशोत्तरी (4)द्वादशोत्तरी (5) पंचोत्तरी (6)शतसमा  (7) चतुर शीत्यब्दा (8)द्विसप्तति समा (9)षष्टयब्दा (10)षट्त्रिशद वस्सरा (11) काल दशा (12)चक्र दशा (13) काल चक्र दशा  (14)  चर दशा  (15) स्थिर दशा (16) केंद्रादि  दशा  (17)कारक दशा (18) ब्रह्म दशा (19) मंडूक दशा (20) शूल दशा  (21) योगार्ध  दशा (22) दृग् दशा (23) त्रिकोण दशा (24) राशि दशा  (25)   पंचस्वर दशा (26) योगिनी दशा (27) पिण्डायुर्दशा (28) अंशायुर्दशा (29) निसर्ग दशा  (30) सन्ध्या दशा  (31) पाचक दशा (32)तारा  दशा  
ये है कुल मिलाकर 32 दशाए ।

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Friday, May 15, 2020

जिगर से सम्बंधित रोग के ज्योतिषीय योग--

जिगर से सम्बंधित  रोग के ज्योतिषीय  योग निम्न  है--
(1)सूर्य, चंद्रमा,मंगल,गुरु यदि हीनबली,पापग्रस्त,दुस्थान  मे हो तो  जिगर रोग देते है।

(2) शनि +मंगल+ गुरु यदि लग्न में  हो तो भी जिगर रोग देते है ।

(3) गुरु +लग्नेश यदि षष्ठ  भाव मे हो तो भी जिगर से सम्बन्धित  रोग देता है।

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Thursday, May 14, 2020

बवासीर के ज्योतिषीय योग--

बवासीर  के ज्योतिषीय  योग निम्न है--

(1) अष्टमेश पापग्रह से युक्त होकर सप्तम भाव मे स्थित  हो तो बवासीर  रोग का संकेत करता  है।

(2)  अष्टम  भाव मे (षष्ठेश + पापग्रह ) की युति हो तो भी बवासीर  रोग का संकेत  देता है ।

(3) सिंह  राशि के (मंगल+बुध+लग्नेश) चतुर्थ  या द्वादश  भाव मे युति करे तो भी बवासीर रोग का संकेत करता  है।

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Wednesday, May 13, 2020

प्रेमिका से विवाह के योग -

प्रेमिका  से विवाह के योग निम्न है--

(1) पंचमेश  तथा सप्तमेश  की युति लग्न, पंचम,सप्तम या एकादश  भाव मे हो ।

(2) पंचमेश,सप्तमेश का आपस मे दृष्टि  विनिमय या राशि परिवर्तन  हो।

(3) लग्नेश तथा  सप्तमेश  के मध्य  दृष्टि  युति सम्बंध या राशि परिवर्तन  हो ।

(4) प्रश्न  कुंडली मे चंद्रमा तथा शुक्र उच्चराशिस्थ या स्वगृही  हो ।
(5) सप्तम भाव मे चंद्र्मा की लग्नेश से युति हो ।

इनमें  से कोई भी योग होने पर जातक अपनी पसंद की पत्नि पाता  है ।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar

Tuesday, May 12, 2020

प्रश्न के अनुसार कन्या रत्न प्राप्ति के योग--

कन्या रत्न प्राप्ति  के योग निम्न है ।

(1) प्रश्न  कुंडली मे यदि चंद्रमा, गुरु,मंगल,सम राशि मे हो।

(2) लग्नेश व पंचमेश  का दृष्टि  युति सम्बंध चन्द्रमा,बुध,शुक्र या शनि से हो तथा सूर्य ,मंगल, गुरु से नही हो ।

(3)  प्रश्न कुंडली मे चंद्र व शुक्र सम राशि मे स्थित  होकर पंचम भाव या पंचमेश से दृष्टी युति सम्बंध करे । 
इनमें  से कोई भी योग होने पर प्रश्नकर्ता  को कन्या रत्न की प्राप्ति होगी ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar 

Monday, May 11, 2020

आलस्य पन होने के ज्योतिषीय योग --

आलस्य  के ज्योतिषीय  योग निम्न  है ।

(1) लग्न पर पाप ग्रह की द्रष्टि  जातक को आलसी  बनाती है ।

(2) हीन बली या नीचस्थ  लग्नेश अधिकतर  जातक को आलसी  बनाता है ।

(3) लग्न या लग्नेश से शनि का सम्बंध जातक को बहुधा आलसी  बनाता  है ।

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कुंडली विशेषज्ञ -- Astroplus Durvesh kumar 

Sunday, May 10, 2020

वृषण रोग ( Hydrocele) के ज्योतिषीय योग--

अंडकोषो मे पानी भर  जाना या उनका बढ जाना ही  Hydrocele कहलाता  है ।इसके ज्योतिषीय  योग निम्न है।

(1) मंगल,शनि व राहु की युति लग्न या षष्ठ भाव मे हो ।

(2) लग्नेश व राहु की युति अष्टम भाव मे हो ।
(3) स्वगृही  मंगल की शुक्र से युति अथवा मंगल व शुक्र अष्टम भाव मे हो तो भी अंड  वृद्धि होती है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar 

Saturday, May 9, 2020

गजकेसरी योग कैसे बनता है--

गजकेसरी योग -------

(1)  यदि चंद्र से केंद्र मे गुरु स्थिति हो तो गजकेसरी योग बनता  है।

(2) यदि चंद्रमा शुक्र,गुरु,बुध से द्रष्ट हो और देखने वाले ग्रह नीच  अथवा अस्त ना हो तो गजकेसरी  योग बनता है ।

परिणाम :- गज केसरी  योग मे जन्म लेने वाला जातक तेजस्वी, धन धान्य  से युक्त  मेधावी,गुण संपन होता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--  Astroplus Durvesh Kumar 

Friday, May 8, 2020

दरिद्र योग कैसे बनता है--

निम्नलिखित योगो के कारण  दरिद्र योग बनता  है--

(1) यदि सूर्य तथा चंद्रमा एक साथ हो और नीच  ग्रह से दृष्ट  हो ।

(2) यदि सूर्य  तथा चन्द्रमा एक साथ हो और पाप नवांश मे स्थित  हो ।

(3) चंद्र भी राहु आदि से तथा पापी ग्रह से भी पीड़ित  हो।

(4) लग्न से  चारो केन्द्रो मे केवल पापी ग्रह हो।

(5) चंद्र से चारो केन्द्रो मे केवल पापी ग्रह हो।

फल--- ऊपर दिये गये योगो मे जन्म लेने वाला जातक  निर्धन होता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar 

Thursday, May 7, 2020

प्रश्न कुंडली मे ग्रह द्रष्टि से खोयी हुईं वस्तु की स्थिति का ज्ञान--

लग्न पर विभिन्न  ग्रह की द्रष्टि या युति खोयी वस्तु के छिपे होने का संकेत निम्न है--

(1) ग्रह--- सूर्य,मंगल
      द्रष्टि---- ऊर्ध्व 
      स्थान --- छत, अलमारी के खानो मे या ऊपर, परछत्ती  मे ।

(2)ग्रह --- चंद्र,गुरु
    द्रष्टि----- सम  
   स्थान --- कमरा, आंगन,बरामदा,या कही समतल  भूमि में फर्श पर ही सामान  पडा  है।

(3) ग्रह-- बुध,शुक्र
     द्रष्टि--- तिर्यग 
    स्थान--- दो दीवारे जहां मिले उस कोने मे या नाली के मुह पर मिले ।

(4) ग्रह-- शनि,राहु
      द्रष्टि -- अधो द्रष्टि 
  स्थान---- भूमि के निचे,तहखाने सुरंग या  या बडी  नाली  मे वस्तु छिपाई  गयी है ।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar

Wednesday, May 6, 2020

ज्योतिष के अनुसार कुष्ठ रोग कब होता है--

कुष्ठ रोग मे राहु (विष),बुध (त्वचा) तथा मंगल(रक्त) का विशेष योगदान है । कभी कभी सूर्य का पापी होना भी कुष्ठ रोग दे दिया करता है।

कुष्ठ रोग के ज्योतिषीय  योग निम्न है--

(1) (षष्ठेश +सूर्य) लग्न मे रक्त कुष्ठ देता है।

 (2) मंगल लग्न मे ,शनि चतुर्थ मे ,सूर्य अष्टम  मे होने पर कोढ देता है ।

(3)सूर्य+मंगल+शनि की युति  भी कुष्ठ रोग देती है ।

(4)लग्नेश या चंद्रमा  का दृष्टि युति सम्बंध मंगल,राहु या केतु से होने पर सफेद कुष्ठ रोग देता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar 

Tuesday, May 5, 2020

ज्योतिष के अनुसार बांझपन के योग--

स्त्री मे प्रजनन शक्ति का अभाव  ही बांझपन  कहलाता  है।जो योग नपुसंकता के होते है स्त्री के लिये वही योग स्त्री को बांझ बनाते है ।इसके  अतिरिक्त स्त्री की कुंडली मे निम्नलिखित योग भी बांझपन  को दर्शाते  है।---

(1) लग्न मे( चन्द्रमा+मंगल+शुक्र )या (चंद्रमा+शुक्र +शनि ) की युति तथा पंचम भाव पाप ग्रहो से दृष्ट या युक्त हो।

(2)लग्न मे मंगल या शनि की राशि के  तथा चंद्र्मा व शुक्र की  युति तथा उन पर पाप ग्रहो की दृष्टि हो ।

इनमें  से कोई भी योग सन्तान की उत्पत्ति मे बाधक बनकर  बांझपन  दे दिया करता  है।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar

Monday, May 4, 2020

ज्योतिष के अनुसार नपुंसकता के कारण--

नपुंसकता  के ज्योतिषीय  योग निम्न हैं ।

(1) शुक्र व शनि की युति  दशम भाव मे हो अथवा शनि,शुक्र से षष्ठ या द्वादश भाव मे हो ।

(2) सूर्य से द्वितीय  मे शनि,सप्तम मे मंगल तथा दशम मे चन्द्रमा हो तो  नपुंसकता  का योग बनता है।

(3) बुध,शनि,राहु लग्न या सप्तम भाव मे हो तो भी नपुसंकता  का योग बनता  है।

(4) षष्ठेश,बुध व राहु की लग्नेश से द्रष्टि युति  हो तो भी नपुंसकता  का योग बनता है ।
(5) सूर्य,बुध,शनि की युति हो तथा सप्तम भाव या सप्तमेश से सम्बंध हो तो भी नपुंसकता  का योग बनता  है।

(6) शुक्र व शनि  की युति तृतीय,एकादश या अष्टम भाव मे हो तो भी नपुंसकता  का योग बनता  है ।
इनमे से कोई भी एक योग मनुष्य को सन्तान पैदा करने के  अयोग्य बनाता  है।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar

Sunday, May 3, 2020

ग्रह वक्री होने का विशेष फल --

वक्री  होने का विशेष फल निम्न  है ।

(1) मंगल,शनि या दु:स्थान  के स्वामी अथवा दुस्थान  मे बैठे ग्रह वक्री होने पर अधिक अशुभ  व अनिष्टकारी  हो जाते है।

(2) बुध,गुरु,शुक्र त्रिकोण मे हो या त्रिकोणेश ग्रह वक्री होने पर अधिक कल्याणकारी  हो जाते है ।

(3) गोचर मे शुभ ग्रह का वक्री होना अधिकांश धन मान,यश व सत्ता का सुख दिया करता है।

(4) पाप ग्रह का वक्री होना धन व पद की हानि, असफलता और कभी कभी शत्रु  का भय देता है ।


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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar

Saturday, May 2, 2020

चन्द्रमा का राशि कुंडली मे गोचर फल --

चन्द्र्मा का राशि कुंडली मे गोचर फल निम्न है ---

प्रथम भाव-- आरोग्य लाभ,धन व सुख , भाग्य उदय ।

द्वितीय  भाव-- धन हानि,कुटुंब  से अपमान,अपयश ।

तृतीय  भाव-- संघर्ष विवाद मे विजय, प्रसन्नता  व धेर्य, बल प्रताप।

चतुर्थ भाव--  बंधु  बांधव से वैर  विरोध,परिवार मे कलह कलेश का डर ।

पंचम भाव-- आसक्ति,दुख, शोक,वायु  रोग,मित्रो से विरोध व कार्य  हानि ।

षष्ट  भाव-- स्वास्थ्य लाभ,कार्य  सिद्धि,रोग व शत्रुता का नाश ।

सप्तम भाव -- धन, वाहन,आदि भोग सुख ।

अष्टम  भाव-- रोग, पीडा,वियोग सन्ताप,विवाद ।

नवम भाव-- रोग पीडा,वस्त्राभूषण  की हानि,जन्म भूमि का त्याग,राज दंड  का डर।

दशम भाव-- इष्ट  सिद्धि- सफलता,सम्मान व सुख ।

ग्यारहवा  भाव-- उत्सवो का सुख,इच्छित  कार्य  मे सफलता  ।

बारहवा भाव-- व्यय,हानि की चिन्ता,व सन्ताप ।

         सद्गुरु  कृपा ज्योतिष केंद्र

कुंडली विशेषज्ञ -- Astroplus Durvesh Kumar

Friday, May 1, 2020

योगिनी दशा क्या है-

भगवान शिव की अष्ट प्रधान योगिनियो के नाम से कुल 8 योगिनी  दशाए है जो निम्न है--
(1)मंगला---
दशा अवधि-- 1 वर्ष 
स्वामी  ग्रह---  चन्द्रमा
शुभ/अशुभ---- शुभ व कल्याणकारी 

(2) पिंगला----
दशा अवधि-- 2 वर्ष
स्वामी  ग्रह-- सूर्य
शुभ/अशुभ-- दुख व पीडा दायक

(3) धन्या----
दशा अवधि--3 वर्ष
स्वामी ग्रह-- गुरु 
शुभ/अशुभ-- धन,मान  व सुख प्राप्ति 

(4) भ्रामरी---
दशा अवधि-- 4 वर्ष 
स्वामी  ग्रह--- मंगल 
शुभ/अशुभ-- पर्यटन,स्थानांतर,परिश्रम 

(5) भद्रिका---
दशा अवधि--5  वर्ष
स्वामी ग्रह--बुध
शुभ/अशुभ-- स्नेह,सौहार्द  व सहयोग बुद्धि 

(6)  उल्का--
दशा अवधि-- 6 वर्ष
स्वामी ग्रह-- शनि
शुभ/अशुभ-- धन,मान  व सुख की हानि

(7) सिद्धा--
दशा अवधि--7वर्ष 
स्वामी ग्रह-- शुक्र 
शुभ /अशुभ-- पद प्रतिष्ठ,सुख सम्मान प्राप्ति

(8) संकटा--
दशा अवधि--8वर्ष 
स्वामी ग्रह--  राहु 
शुभ/अशुभ-- चोरी अग्नि भय से धन वैभव की हानि 

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कुंडली विशेषज्ञ --Astroplus Durvesh Kumar

Thursday, April 30, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या नौकरी बदलना उचित है --

नौकरी बदलना  उचित है या नही के योग निम्न हैं ।

(1)लग्न से द्वितीय,सप्तम व अष्टम  भाव मे पाप ग्रह की स्थिति  होने पर नौकरी बदलना  उचित है।कारण  लग्न से 2,7,8 वे भाव  मे पाप ग्रह स्वामी व सेवक दोनो के लिये अनिष्ट है।

(2)यदि लग्नेश केंद्र मे बैठकर षष्ठेश या व्ययेश से द्रष्टि युति करे तो दूसरे मलिक से धन लाभ होगा ऐसा जाने।
(3)लग्न मे शीर्षोदय  व चर राशि तथा लग्नेश का बली होना भी दुसरी नौकरी से धन लाभ या पद  की उन्नति होने का संकेत देता है।

      सद्गुरु कृपा ज्योतिष  केंद्र 

कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh kumar 

Wednesday, April 29, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरा स्वास्थ्य लाभ कैसा है--

स्वास्थ्य  लाभ के कुछ प्रमुख योग निम्न है ।

(1) यदि प्रश्न कुंडली का लग्नेश बली हो तथा शुभ ग्रह उच्च  या त्रिकोण राशि के होकर केंद्र मे बैठे हो।

(2)लग्न मे बैठा  कोई भी शुभ ग्रह चन्द्र्मा से दृष्टि  सम्बंध  करे ।

(3)केंद्र,त्रिकोण  व अष्टम भाव मे शुभ ग्रह हो तथा चंद्रमा उपचय  भाव मे हो ।

(4)लग्न व चन्द्रमा का सम्बंध शुभ ग्रहो से हो या लग्न और चंद्र्मा पर शुभ दृष्टि हो तो भी स्वास्थ  अच्छा रह्ता है।

    सद्गुरु  कृपा ज्योतिष  केन्द्र 

कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Tuesday, April 28, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या मुझे वाहन सुख प्राप्त होगा--

वाहन लाभ के योग निम्न है ---

(1) यदि द्वितीयेश  लग्न मे,दशमेश  धन भाव मे तथा चतुर्थ  भाव मे कोई ग्रह उच्च  राशि मे हो  तो वाहन लाभ होता है।

(2)लग्न, नवम या लाभ स्थान मे लग्नेश चतुर्थेश  की युति पर चंद्रमा की द्रष्टि हो  तो भी वाहन लाभ होता है।
(3)लग्नेश, धनेश,तथा चतुर्थेश  का आपस मे सम्बंध  हो तो भी वाहन  लाभ होता है।

(4)लग्न या चतुर्थ भाव  मे( शुक्र + चतुर्थेश )  की युति हो तो भी वाहन  सुख होता है।

(5) नवमेश+दशमेश + एकादशेश)की युति चतुर्थ भाव मे हो तो  भी उत्तम वाहन सुख प्राप्त  होता है।

       सद्गुरू  कृपा ज्योतिष  केंद्र

कुंडली विशेषज्ञ -Astroplus Durvesh Kumar 

Monday, April 27, 2020

डायबीटिज के ज्योतिषीय योग--

डायबीटिज  के ज्योतिषीय  योग निम्न  है।

(1) गुरु यदि शनि की राशि अथवा नक्षत्र मे हो और पाप ग्रह से दृष्ट हो ।

(2) गुरु पर शनि की द्रष्टि युति हो ।

(3)चंद्रमा या कर्क राशि से शनि  द्रष्टि युति करे ।

(4)राहु की अष्टमेश  से अष्टम या त्रिकोण मे युति  हो ।
 (5)अष्टम भाव पाप युक्त तथा चंद्रमा, गुरु व शुक्र मे से कोई 2 ग्रह पापी  हो तो  डायबीटिज  के लक्षण  बनते  है ।

     सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र 

कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar 

Sunday, April 26, 2020

ग्रहो के रत्न और धातु --

 ग्रहो के रत्न व धातु निम्न हैं----

ग्रह---     रत्न   ---  धातु 
सूर्य----- माणिक-- तांबा 
चंद्र----- मोती------ चांदी 
मंगल--- मूँगा------- तांबा, सोना 
बुध----- पन्ना------- सोना,चांदी,काँसा 
गुरु----- पुखराज--- सोना 
शुक्र---- हीरा-------- चांदी
शनि---- नीलम----- लोहा 
राहु----- गोमेद----- रांगा ,सोना 
केतु ---- लह्सनिया-- सोना,काँसा 

      सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र 

कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh  Kumar

Saturday, April 25, 2020

प्रश्न के अनुसार चोरी किया हुआ धन कहा छिपा है-

धन कहा छिपा है निम्नलिखित  योग से जाने--
(1) - लग्न मे चर राशि होने पर माल घर से बाहर  कही दूर है।
(2)-लग्न मे चर या द्विस्वभाव राशि हो तो चतुर्थ भाव मे स्थित  ग्रह  से धन की सही स्थिति  जानी  जाती है ।:-
सूर्य से--घर के स्वामी   के बैठने के स्थान  पर ।
चंद्रमा  से--जलाशय या पानी की टंकी के पास।
मंगल से-- अग्नि शाला या चूल्हे के पास ।
बुध से--  पुस्तकालय  या स्कूल  के पास  या अनाज गोदाम  के पास होती है।
गुरु से-- मन्दिर या बगीचे मे ।
शुक्र से-- शयनकक्ष  या जनाना  घर मे ।
शनि से--कही भी कबाड या  कूडे  के ढेर मे  धन का छिपा होना जाने ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar 

Friday, April 24, 2020

ज्योतिष के अनुसार विवाह के अभाव का योग

विवाह के अभाव का योग निम्न है--

परिभाषा--जब सप्तम भाव,सप्तमेश तथा शुक्र  तीनों  पीड़ित  तथा निर्बल  हो और इनमें किसी के ऊपर  भी  कोई शुभ युति अथवा द्रष्टि न हो तो जातक को पत्नी की प्राप्ति नही होती है ।

हेतु-- यहां  सिद्ध हो गया की विवाह के तीनों  अंग  निर्बल होने से विवाह ना होगा ।

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कुंडली विशेषज्ञ --Astroplus Durvesh kumar 

Thursday, April 23, 2020

ज्योतिष के अनुसार मनुष्य आलसी क्यो होता है।

आलसी होने के योग निम्न है----
1--लग्न का स्वामी शनि के साथ बैठा हो तो जातक आलसी होता है।
2--लग्न पर पाप  ग्रहो  की द्रष्टि हो तब भी जातक आलसी किस्म का होता है।
3--गुरु और शनि किसी भी भाव मे एक साथ  बैठे हो तो भी जातक आलसी किस्म का होता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ -Astroplus Durvesh kumar 

ग्रहो के कारकत्व,रंग और गुण---

(1) ग्रहो के कारकत्व ---

सूर्य---------‐‐ आत्मा
चंद्रमा--------मन
मंगल--------बल
बुध----------वाणी 
गुरु----------ज्ञान 
शुक्र---------कामवासना 
शनि--------दुख

(2) ग्रहो के रंग---

सूर्य------------नारंगी 
चंद्र------------क्रीम 
मंगल---------लाल
बुध-----------हरा 
गुरु-----------पीला
शुक्र----------सफेद(पारदर्शी)
शनि----------काला,नीला

(3) ग्रहो के गुण-----

सूर्य,चंद्र,गुरु----------सात्विक 
शुक्र,बुध--------------राजसी 
मंगल,शनि------------तामसी 

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Tuesday, April 21, 2020

भास्कर योग कैसे बनता हैं--

परिभाषा--सूर्य से बुध दूसरे स्थान मे हो बुध से चंद्रमा  एकादश  स्थान मे हो,चन्द्र्मा से गुरु त्रिकोण (नवम भाव ज्यादा  अच्छा है) में  हो तो भास्कर  योग बनता  है ।
फल--भास्कर  योग मे जन्म  लेने वाले जातक  शूरवीर,शास्त्रो को जानने  वाला,रूपवान  गाने का शौकीन ,ज्ञानी,  धनी,धीर तथा समर्थ होता है ।

Monday, April 20, 2020

ज्योतिष के अनुसार लंगड़ेपन के योग--

लंगड़े पन के योग निम्न है---
1--बुध,शनि,राहु कि युति दशम भाव मे हो तो पैर के कटने का डर  रह्ता है।

2--पूर्ण चंद्रमा,मंगल षष्टस्थान मे हो,व्यय भाव  मे स्थित  सूर्य से द्रष्ट हो  तो लंगड़े पन का संकेत देता है।
3--अष्टमेश,नवमेश,पापग्रह  कि युति चतुर्थ भाव मे हो तो लंगड़े पन का संकेत  देता है ।


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Sunday, April 19, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरा प्रेम विवाह होगा या नही --

1-- यदि चंद्रमा 3,6,10,11 वे भाव या सप्तम भाव मे  शुभ ग्रह कि राशि मे स्थित होकर बुध,गुरु,सूर्य या शुक्र से द्रष्टि युति सम्बंध  करे ।
2--लग्नेश और सप्तमेश का आपस मे राशि परिवर्तन हो।सप्तमेश  विवाह का कारक होकर  लग्न मे हो और लग्नेश सप्तम भाव मे हो तो बहुत ही शुभ है।
3--लग्नेश और व्ययेश का आपस मे द्रष्टि युति या स्थान परिवर्तन  सम्बंध  हो ।

इनमें  से कोई भी योग हो तो प्रेम विवाह मे सफलता जरुर मिलती है ।

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Saturday, April 18, 2020

विवाह सुख मे बाधक कुछ अरिष्ठ योग--

1--सप्तमेश  अशुभ ग्रह से युक्त हो या शुभ नीच राशिस्थ  हो,अथवा सप्तम भाव मे  पाप ग्रह का योग अथवा द्रष्टि हो तो पुरुष या स्त्री के विवाह में  या वैवाहिक  जीवन मे उलझनें व परेशानिया  खडी हो जाती है ।

2--सातवें  भाव मे राहु के साथ चंद्रमा ,मंगल का सम्बंध हो तो भी स्त्री के कारण कष्ट होता  है।।

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Thursday, April 16, 2020

क्या खोयी हुई वस्तु मिलेगी या नही--

नक्षत्रो के अनुसार ----
1--अन्धाक्ष नक्षत्रो मे गुम हुईं  अथवा चोरी हुई  वस्तु पूर्व दिशा कि और जाती है और उसकी  पुन: प्राप्ति कि शीघ्र  सम्भावना  रहती है ।
2--सुलोचन  नक्षत्रो  मे गुम हुई  वस्तु उत्तर  दिशा मे जाती है परंतु उसका न तो पाता चलता है और न ही प्राप्त होती हैं ।
3-- मध्याक्ष नक्षत्र  मे खोयी वस्तु  पश्चिम दिशा कि और बहुत दूर चली जाती है पता  चलन पर भी नही प्राप्त होती है।
4--मन्दाक्ष नक्षत्र  मे गुम अथवा चोरी हुई वस्तु दक्षिण कि और चली जाती है  तथा अत्याधिक  प्रयत्न करने  पर  अन्त मे प्राप्त हो जाती है।
                  
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Tuesday, April 14, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या हमे जुडवा सन्तान प्राप्त होगी --

जुडवा सन्तान होने के योग --
1--प्रश्न  कुंडली के चार स्थानो पर 2-2 ग्रहो कि स्थिति जुडवा सन्तान का संकेत देती हैं ।
2--प्रश्न  लग्न मे द्विस्वभाव  राशि हो तथा लग्न या पंचम भाव मे शुभ ग्रहो कि युति हो तो जुडवा सन्तान जाने ।
3--गर्भाधान  या प्रश्न  के समय  सूर्य,चंद्र,मंगल गुरु,और  शुक्र  यदि द्विस्वभाव राशि या द्विस्वभाव नवमांश  मे हो तो इसे जुडवा सन्तान जन्म का संकेत जाने ।।

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Sunday, April 12, 2020

मन्द बुद्धि जातक के ज्योतिषीय योग --

1--लग्न मे पाप ग्रहो कि स्थिति या द्रष्टि हो तथा पंचमस्थ शनि लग्नेश से द्रष्टि  युति सम्बंध  करे तो जड़  बुद्धि योग बनता  है।
2--पंचम भाव मे शनि +राहु कि युति,बुध द्वादश  भाव मे हो तथा पंचमेश पाप ग्रहो से युक्त या द्रष्ट हो तो स्मरण  शक्ति  दुर्बल होती है ।
3--लग्नेश व पंचमेश दोनो ग्रह नीचस्थ,शत्रु  क्षेत्री या पाप युक्त हो तो जातक मन्द बुद्धि होता है।
4--लग्नस्थ चन्द्र्मा पर शनि व मंगल कि द्रष्टि हो ।

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Thursday, April 9, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरा सन्तान सुख कैसा है--

प्रश्न  कुंडली मे पंचम भाव को सन्तान का कारक भाव माना  गया है ।

1--यदि चंद्रमा अथवा लग्नेश पंचम स्थान मे हो ।

2--पंचमेश लग्न भाव मे स्थित हो ।
3--लग्नेश तथा पंचमेश कि युति लग्न अथवा पंचम भाव मे हो 
इनमे से कोई भी योग उत्तम सन्तान सुख का संकेत देता है ।

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Monday, April 6, 2020

प्रश्न के अनुसार नौकरी मे बाधा क्यो हैं---

1--प्रश्न कुंडली मे  लग्नेश व दशमेश का सम्बंध 6,8,12वे भाव या इनके  स्वामियो से होना विघ्न बाधा या कार्य  हानि  को दर्शाता है ।
2--दशम भाव का मन्द गति  ग्रह (शनि,राहु) से सम्बंध तथा लग्नेश व चंद्रमा का हीन बली होना आजीविका  प्राप्ति मे बाधा देता है ।
3--लग्नेश व दशमेश का पाप ग्रस्त होकर 6,8 वे भाव मे होना भी नौकरी  का निषेध दर्शाता है ।
4--लग्नेश व दशमेश चतुर्थ भाव मे स्थित वक्री ग्रह या मन्द गति ग्रह शनि या राहु से सम्बंध करे तो लगी हुई नौकरी  छूटने का भय  होता है ।

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अनिद्रा के ज्योतिष्य योग ---

अनिद्रा के प्रमुख योग निम्न प्रकार हैं---

1--लग्न में  नीच राशिस्थ शनि पर सूर्य  कि द्रष्टि हो ।
2--लग्न मे स्थित  सूर्य या चंद्रमा का मंगल-शनि से द्रष्टि युति सम्बंध  हो ।
3--सप्तम भाव मे नीच राशि का शनि या मंगल,लग्न,लग्नेश, या सुर्य  व चन्द्र्मा से द्रष्टि युति सम्बंध करे ।

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Saturday, April 4, 2020

रक्त पित्त रोग के ज्योतिषीय कारण--

1--मंगल सप्तम भाव मे स्थित  हो।
2--मंगल कर्क  राशि  मे नीचस्थ  हो ।
3--षष्ट भाव तथा  षष्ठेश  का सम्बंध मंगल तथा अन्य  पाप ग्रहो से भी हो ।
4--चंद्रमा मे मंगल  की युति हो ।

इनमे से कोई भी योग होने पर रक्त पित्त रोग की सम्भावना बढ जाती है ।

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Friday, April 3, 2020

मस्तिष्क गांठ के ज्योतिषय योग--

1---  बुध शत्रु स्थान या हीन बली होकर,मंगल  या शनि से युक्त  या दृष्ट हो ।
2--सूर्य या चन्द्र्मा मे साथ,मंगल लग्न्स्थ  होकर पाप द्रष्ट हो ।
3--सूर्य,चंद्रमा,मंगल की युति,अष्टम भाव मे हो तथा पाप ग्रह अष्टम भाव से देखे।
4--चंद्रमा ,मंगल व शनि के साथ अष्टमसथ  हो ।
5--लग्नेश व मंगल  की युति  त्रिक  स्थान मे हो।

इनमें  से कोई भी योग मस्तिषक  मे गांठ  या  फोडा  दे सकता है।

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कुंडली विशेषज्ञ -Astroplus Durvesh kumar

Wednesday, April 1, 2020

स्त्री दुराचारिणी किस कारण होती हैं--

1--यदि शुक्र  द्वितायेश होकर राहु से युक्त  हो तो ऐसी स्त्री दुराचारिणी  होती हैं ।
2--यदि मंगल द्वितायेश  होकर शनि से युक्त हो तो ऐसे स्त्री दुराचारिणी  होती हैं ।
3--यदि अष्टम भाव मे मंगल हो तो ऐसी स्त्री व्यभिचाराणि  होती है ।
4--यदि अष्टम भाव मे राहु हो तो ऐसी स्त्री धर्म विहीन  व पुरुष गामिनी होती है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar

पति त्याग योग क्या है--

1--यदि सप्तम भाव मे 1 पाप ग्रह बलहीन  बैठा हो तथा उस पर किसी शुभ ग्रह की द्रष्टि  भी ना हो तो ऐसी स्त्री को उसका पति त्याग  देता है।

2--यदि सप्तम भाव मे सूर्य ,मंगल तथा शनि हीनबली  हो और वे शुभ ग्रह से दृष्ट भी हो तो ऐसी स्त्री को उसका पति त्याग देता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Tuesday, March 31, 2020

कुछ महत्त्वपूर्ण योग ज्योतिष मे--

1-यदि जन्म  का स्वामी 6,8,12 भाव के स्वामी के साथ जन्म मे हो और उस पर क्रुर ग्रह की द्रष्टि या युति हो तो उसका  स्वस्थ ठीक नही रहेगा ।यदि उस  पर किसी  सौम्य  ग्रह की द्रष्टि  हो तो इस अनिष्ट की भविष्यवाणी  नही करनी चाहिये।
2--यदि लग्नाधिपति  लग्न मे हो और क्रुर ग्रह की युक्ति हो तो जातक शारीरिक  रूप से सुखी नही होगा।
3--यदि स्वामी प्रबल हो,उत्तम ग्रह केंद्र मे पड़े  हो और लग्न मे अनिष्ट ग्रहो की द्रष्टि ना हो तो शरीर से काफी सुखी  रह्ता है।
4--यदि लग्न के स्वामी के साथ अनिष्ट ग्रह की युक्ति हो और राहु लग्न मे हो तो उस  जातक के साथ कपट होता है ।

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कुंडली  विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar

Monday, March 30, 2020

प्रश्न के अनुसार ससुराल की दूरी कितनी होगी---

1-- सप्तम भाव मे चर राशि(1,4,7,10)या सप्तम भाव मे शीघ्र गामी  ग्रहो  का प्रभाव दूर देश में  विवाह कराता  है  ।यानी लगभग 300 किलोमीटर  दूरी ।
2--सप्तम भाव मे स्थिर राशि (2,5,8,11) होने से ससुराल 100 किमी  से भी कम  दूरी पर होती है ।
3--सप्तम भाव मे द्विस्वभाव  राशि (3,6,9,12) होने से ससुराल लगभग 150-200किमी  दूर होती हैं ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Saturday, March 28, 2020

कुंडली मे नीच ग्रह---

कुंडली में जब कोई ग्रह नीच राशि का होता है तब आम तौर पर यह समझ लिया जाता है कि यह ग्रह अवश्य फल अशुभ फल देगा। परंतु वास्तविकता कुछ और है, आईये देखें कुंडली में नीच ग्रह का अवलोकन कैसे करे :-

किसी भी ग्रह के नीच राशि में होने से अभिप्राय उसके बलहीन होने से है, न की उसके शुभ अशुभ होने से। बलहीन से अभिप्राय है की, ग्रह की फल देने की जो क्षमता होती है, उसमे कमी आ जाती है, ऐसे में ये ग्रह जातक को अपना पूर्ण फल नही दे पाता है।

इसे इस प्रकार समझें:- हर ग्रह किसी न किसी राशि में किसी विशेष अंश पर परम नीच होता है, जिसका अभिप्राय है की इस अंश पर ग्रह का बल बिलकुल न्यून होगा, और वो जैसे-जैसे उस अंश से आगे बढ़ता जाएगा उसका बल बढ़ता जाएगा और उसकी फल देने की क्षमता भी बढती जायेगी।

कोई ग्रह किसी राशि विशेष में ही नीच क्यों होता है, उसके पीछे कोई न कोई ज्योतिषीय कारण अवश्य होता है, जिसकी आगे के किसी लेख में विस्तार से चर्चा करूंगा, जैसे की मंगल अपने मित्र चन्द्र की राशि में नीच क्यों है, इसके पीछे ये कारण है की मंगल अग्नि तत्व ग्रह है, और कर्क राशि जल तत्व राशि है, ऐसे में यहाँ मंगल की ताकत कम हो जाती है। इसका दूसरा कारण है की, मंगल को सेनापति का दर्जा ज्योतिष में प्राप्त है, तो चन्द्रमा को रानी का, और जैसे की आप जानते है की रानी के सामने कोई भी सेनापति अपने को असहाय महसूस करता है, क्योंकि वो अपने बल का प्रयोग नही कर सकता।

अक्सर नीच के ग्रह के बुरे फल जातक को मिलते हैं ऐसा माना जाता है। इसका कारण ये है की, जब कोई ग्रह नीच की राशि में हो तो, उसका बल काफी कम हो जाता है, जिससे वे अपना शुभ फल जातक को दे ही नही पाता है, लेकिन मेरा ये मानना है की हमें किसी ग्रह को केवल नीच की राशि में देखते ही उसके बुरे फल के बारे में नही घोषणा करनी चाहिए। कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिसमे नीच का ग्रह भी हमको शुभ फल दे सकता है,  विद्यार्थीयों को एक खास बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए की ग्रह के नीच होने पर उसके बुरे फल ही नहीं गिनने चाहिए। अर्थात् हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए की ग्रह के नीच या उच्च होने से उसके शुभ अशुभ होने का कोई कारण न होकर उसके बली होने या न होने से होता है। यदि कोई भी ग्रह नीच राशि में है तो इसका ये मतलब होगा की उस ग्रह में उसके कारक तत्वों की कमी होगी, और वो ग्रह जिन तत्वों का कारक है, और कुंडली में जिन भावों का स्वामी है उनसे सम्बन्धित पूर्ण फल नही दे पायेगा। परंतु ऐसा तब माना जायेगा जब नीच राशि में स्थित ग्रह का नीच भंग नहीं हो रहा हो।

दूसरा पहलू यह भी है कि – मान लीजिये की व्यय भाव का मालिक नीच का है, तो ये एक तरह से जातक के लिय अच्छा होगा, क्योंकि जातक के व्यर्थ के खर्च आदि में कमी हो जायेगी।

किसी भी नीच राशि में स्थित ग्रह के फल को देखने के लिए सबसे पहले तो हमें ये देखना होगा की ग्रह का नीच भंग हो रहा है या नही? नीच भंग के लिय ये माना जाता है की यदि कोई ग्रह किसी राशि में नीच का है, और उस राशि का स्वामी उस ग्रह के साथ हो, या उस ग्रह को अपनी पूर्ण दृष्टी से देखता हो, या बलि होकर केंद्र में हो तो, उस ग्रह का नीच भंग हो जाता है। जैसे कि  वृश्चिक के चन्द्रमा के साथ मंगल हो या मंगल की पूर्ण दृष्टी चन्द्र पर हो, या मंगल स्वराशी या उच्चराशि में केंद्र में हो, साथ ही यदि किसी नीच के ग्रह के साथ उंच का ग्रह हो, तो भी नीच भंग हो जाता है। जैसे मकर राशि के गुरु के साथ ही मकर में ही मंगल हो। इसके साथ ही यदि कोई ग्रह लग्न कुंडली में तो नीच का हो, लेकिन नवमांश में उच्च का हो तो, उसका भी नीच भंग हो जाता है।

अब देखना चाहिए कि कोई ग्रह की नीचता भंग नही हो रही हो, तो उसका फल हम कैसा मिलेगा?- उसके लिये सबसे पहले तो हम देखेंगे की उस नीच के ग्रह की राशि के स्वामी की स्थिति कैसी है ? यदि उसकी स्थिति अच्छी है, तो उस नीच के ग्रह के अशुभ फल में कमी होगी।

इसके साथ ग्रह के फल इस बात पर भी निर्भर करते हैं की नीच का ग्रह किस नक्षत्र में है? जैसे की हम चन्द्रमा को लेते हैं- चन्द्रमा हमारी कुंडली में मन का कारक होता है, चन्द्रमा यदि नीच है और नीच भंग नहीं हो रहा, तो जातक दिल का कमजोर होता है, बहुत जल्दी व्यथित होने वाला होता है, लेकिन मुख्य प्रभाव इस बात का है की चन्द्रमा किस नक्षत्र में है। वृश्चिक राशि में तीन नक्षत्र आते हैं, 1. विशाखा, 2. अनुराधा, और 3. ज्येष्ठा। अब विशाखा नक्षत्र में यदि चन्द्र होगा तो उसके बुरे फल काफी कम होंगे, क्योंकि इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है जो कि चन्द्रमा का मित्र ग्रह है। जातक के मन पर गुरु का प्रभाव होगा, और यदि गुरु का साथ किसी भी प्रकार से चन्द्रमा को मिला तो चन्द्रमा नीच का होते हुए भी बुरे फल नही देगा। दूसरा नक्षत्र अनुराधा होता है, और जिसका स्वामी शनि देव होते हैं, और शनि देव को उदासी वैराग्य का कारक माना जाता है, ऐसे में जातक पर नीच के चन्द्रमा का पूरा फल मिलेगा, जिस से जातक के मन पर हर समय एक प्रकार की भारी जिम्मेदारी छाई रहती है, जातक ख़ुशी के माहोल को भी अच्छी तरह इंजॉय नही कर पाता। तीसरा नक्षत्र ज्येष्ठा है, जिसका स्वामी बुध है। अब हमें देखना होगा की बुध का पंचधा मैत्री चक्र के अनुसार चन्द्रमा से कैसा सम्बन्ध बन रहा है? और बुध की कुंडली में क्या स्थिति है। बुध का जातक के मन पर पूर्ण प्रभाव होगा, और यदि बुध कुंडली में अशुभ फल देने वाला हुआ जैसे की मेष लग्न में होता है, तो जातक को नीच के चन्द्रमा के पूर्ण अशुभ फल मिलेंगे।

इस प्रकार कोई भी ग्रह किस नक्षत्र में है, और उसके स्वामी की स्थिति क्या है? उसका पूर्ण प्रभाव जातक पर पड़ता है। जैसे सूर्य जो की हमारी आत्मा का कारक होता है, और तुला राशि में नीच का होता है, तुला में सूर्य उतने बुरे फल विशाखा नक्षत्र में नही देगा जितने बुरे फल स्वाति नक्षत्र में देगा, क्योंकि विशाखा नक्षत्र का स्वामी गुरु है, तो स्वाति का स्वामी राहू होता है। ऐसे में जातक की आत्मा पर राहू का पूर्ण दुष्प्रभाव होगा।

नीच राशि स्थित ग्रह का प्रभाव कैसे होगा? उसे हम इस प्रकार समझ सकते है :- कोई भी ग्रह नीच का होने से उसके जो कारक तत्व हैं, उनकी शरीर में कमी होगी जैसे मंगल हिम्मत और साहस बाहुबल का कारक ग्रह है, और वो कुंडली में नीच का हो गया तो, मंगल जो की हिम्मत और हौसले का कारक है, उसकी जातक में कमी होगी, या फिर जातक अपनी ताकत और हिम्मत का प्रयोग निर्बल लोगों को सताने में करेगा। अब चूँकि मंगल भाई का भी कारक है तो, जातक के भाइयों को भी समस्या देगा, या भाई से सुख जातक का कम कर देगा।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar

Friday, March 27, 2020

वक्री ग्रह क्या होते है और उनके फल--


वक्री ग्रह क्या होते हैं? सूर्य और चन्द्र को छोड़कर सभी ग्रह वक्री होते हैं। वक्री अर्थात किसी राशि में उल्टी दिशा में गति करने लगते हैं। वस्तुतः कोई भी ग्रह कभी भी पीछे की ओर नहीं चलता भ्रम मात्र है। घूमती हुई पृथ्वी से ग्रह की दूरी तथा पृथ्वी और उस ग्रह की अपनी गति के अंतर के कारण ग्रहों का उलटा चलना प्रतीत होता है। किंतु ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कालीन समय पर ग्रहों की ऐसी उलटी गति के कारण उनका प्रभाव जीवन पर उनकी सामान्य गति से अलग होता है।

 

ज्योतिष में वक्री ग्रह के फल के बारे में अलग-अलग मत है। सभी के मतों को पढ़ने के बाद छह तरह के मत प्रकट होते हैं। हम यहां छटवें मत की चर्चा करेंगे।

 

पहला मत- जब ये वक्री होते हैं, तब इनकी दृष्टि का प्रभाव अलग-अलग होता है। वक्री ग्रह अपनी उच्च राशिगत होने के समतुल्य फल प्रदान करता है। कोई ग्रह जो वक्री ग्रह से संयुक्त हो, उसके प्रभाव में मध्यम स्तर की वृद्धि होती है। उच्च राशिगत कोई ग्रह वक्री हो, तो नीच राशिगत होने का फल प्रदान करता है।

 

इसी प्रकार से जब कोई नीच राशिगत ग्रह वक्री होता जाए, तो अपनी उच्च राशि में स्थित होने का फल प्रदान करता है। इसी प्रकार यदि कोई उच्च राशिगत ग्रह नवांश में नीच राशिगत होने, तो नीच राशि का फल प्रदान करेगा। कोई शुभ अथवा पाप ग्रह यदि नीच राशिगत हो, परंतु नवांश में अपनी उच्च राशि में स्थित हो तो वह उच्च राशि का ही फल प्रदान करता है।

 

दूसरा मत- वक्री ग्रह किसी भी कुंडली में सदा अशुभ फल ही प्रदान करते हैं क्योंकि वक्री ग्रह उल्टी दिशा में चलते हैं इसलिए उनके फल अशुभ ही होंगे। 

 

तीसरा मत- कोई भी ग्रह यदि वक्री हो रहा है तो वह प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली के हिसाब से ही शुभ या अशुभ फल देगा। उदारणार्थ गुरु के वक्री होने पर उसके शुभ या अशुभ फल देने के प्रभाव में कोई अंतर नहीं आता अर्थात किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले गुरु वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले गुरु वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे। हां, वक्री होने से गुरु के व्यवहार जरूर बदलाव आता है जैसे वक्री होने की स्थिति में गुरु कई बार शुभ या अशुभ फल देने में देरी कर देते हैं।.. यही नियम अन्य ग्रहों पर भी लागू होते हैं। 

 

चौथा मत- वक्री ग्रह किसी कुंडली विशेष में अपने कुदरती स्वभाव से विपरीत आचरण करते हैं अर्थात अगर कोई ग्रह किसी कुंडली में सामान्य रूप से शुभ फल दे रहा है तो वक्री होने की स्थिति में वह अशुभ फल देना शुरू कर देता है। इसी प्रकार अगर कोई ग्रह किसी कुंडली में सामान्य रूप से अशुभ फल दे रहा है तो वक्री होने की स्थिति में वह शुभ फल देना शुरू कर देता है।

 

पांचवां मत- इसके पश्चात यह धारणा भी प्रचचलित है कि वक्री ग्रहों के प्रभाव बिल्कुल सामान्य गति से चलने वाले ग्रहों की तरह ही होते हैं तथा उनमें कुछ भी अंतर नहीं आता। ज्योतिषियों के इस वर्ग का यह मानना है कि प्रत्येक ग्रह केवल सामान्य दिशा में ही भ्रमण करता है तथा कोई भी ग्रह सामान्य से उल्टी दिशा में भ्रमण करने में सक्षम नहीं होता।
 

 

वक्री ग्रह की दृष्टि का छठा मत- 

ज्योतिषियों का एक वर्ग के अनुसार अगर कोई ग्रह अपनी उच्च की राशि में स्थित होने पर वक्री हो जाता है तो उसके फल अशुभ हो जाते हैं तथा यदि कोई ग्रह अपनी नीच की राशि में वक्री हो जाता है तो उसके फल शुभ हो जाते हैं।

 

सूर्य : यह ग्रह मेष में उच्च का और तुला में नीच का होता है। लेकिन यह वक्री नहीं होता है।

चंद्र : यह ग्रह वृषभ में उच्च का और वृश्चिक में नीच का होता है। लेकिन यह वक्री नहीं होता है।
 

 

1.मंगल- मंगल की दो राशियां है- पहली मेष और दूसरी वृश्चिक। यह ग्रह मकर राशि में उच्च का और कर्क राशि में नीच का होता है। जब मंगल वक्री होता है तो स्वा‍भाविक रूप से मकर राशि वालों के लिए सकारात्मक और कर्क राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। मतलब यह कि उच्च राशि पर अच्छा, नीच राशि पर बुरा और सम राशि पर मिलाजुला असर रहता है। लेकिन मंगल जब अन्य राशियों में भ्रमण करता है तो उसका इस राशि वालों लोगों के लिए फल अलग होता है। यही बात सभी राशियों पर लागू होती है।
 

 

2.बुध- बुध ग्रह की दो राशियां हैं- पहली मिथुन और दूसरी कन्या। यह ग्रह कन्या में उच्च का और मीन में नीच का होता है। जब बुध वक्री होता है तो स्वा‍भाविक रूप से कन्या राशि वालों के लिए सकारात्मक और मीन रा‍शि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन बुध जब अन्य राशियों में भ्रमण करता है तो उसका इस राशि वालों लोगों के लिए फल अलग होता है।

 

3.बृहस्पति- इस ग्रह की दो राशियां हैं- पहली धनु और दूसरी मीन। यह ग्रह कर्क में उच्च का और मकर में नीच का होता है। जब बृहस्पति ग्रह वक्री होता है तो स्वा‍भाविक रूप से कर्क राशि वालों के लिए सकारात्मक और मकर राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन बृहस्पति जब अन्य राशियों में भ्रमण करता है तो उसका इस राशि वालों लोगों के लिए फल अलग होता है।
 

 

4.शुक्र ग्रह- इस ग्रह की दो राशियां हैं- पहली वृषभ और दूसरी तुला। यह ग्रह मीन राशि में में उच्च और कन्या ‍राशि में नीच का होता है। जब यह ग्रह वक्री होता है तो स्वा‍भाविक रूप से मीन राशि वालों के लिए सकारात्मक और कन्या राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन शुक्र जब अन्य राशियों में भ्रमण करता है तो उसका इस राशि वालों लोगों के लिए फल अलग होता है।
 

 

5.शनि- इस ग्रह की दो राशियां है- पहली कुंभ और दूसरी मकर। यह ग्रह तुला में उच्च और मेष में नीच का होता है। जब यह ग्रह वक्री होता है तो स्वाभाविक रूप से तुला राशि वालों के लिए सकारात्मक और मेष राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन शनि जब अन्य राशियों में भ्रम करता है तो उसका अलग असर होता है। यदि वह मेष की मित्र राशि धनु में भ्रमण कर रहा है तो मेष राशि वालों पर नकारात्मक असर नहीं डालेगा।
 

 

6.राहु- राहु मिथुन मतांतर से यह ग्रह वृषभ में उच्च का और वृश्चिक में नीच का होता है। जब यह ग्रह वक्री होता है तो स्वा‍भाविक रूप से वृषभ राशि वालों के लिए सकारात्मक और वृश्चिक राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन राहु जब अन्य राशियों में भ्रमण करता है तो उसका इस राशि वाले लोगों के लिए फल अलग होता है।

 

7.केतु- राहु मिथुन मतांतर से यह ग्रह वृश्चिक में उच्च का और वृषभ में नीच का होता है। जब यह ग्रह वक्री होता है तो स्वाभाविक रूप से वृश्चिक राशि वालों के लिए सकारात्मक और वृषभ राशि वालों के लिए नकारात्मक होता है। लेकिन केतु जब अन्य राशियों में भ्रमण करता है तो उसका इस राशि वाले लोगों के लिए फल अलग होता 

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar

Wednesday, March 25, 2020

प्रश्न के अनुसार भूमि या भवन की प्राप्ति कैसे होगी----

1--यदि लग्नेश षष्ट  भाव मे बुध की राशि मे स्थित होकर बुध से द्रष्टि युति सम्बंध करे तो  प्रशंकर्ता  मामा  या नाना  से भू सम्पदा  पाता  हैं ।
2--चतुर्थ  भाव की कुम्भ राशी मे लग्नेश मंगल पर सुर्य की द्रष्टि  बटवारे मे या पिता से भूमि की प्राप्ति होती है।
3---केंद्र  या त्रिकोण भाव मे चतुर्थेश  का (गुरु +शुक्र) से द्रष्टि युति सम्बंध अपने  परिश्रम या प्रयास से भूमि लाभ देता है ।
नोट---ज़मीन की खरीद मे लग्न खरीदार,चतुर्थ भाव भू संपदा ,सप्तम भाव विक्रेता तो दशम भाव सम्पत्ति  का मूल्य  होता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ --Astroplus Durvesh kumar

Tuesday, March 24, 2020

शनि की साढ़े साती व ढैय्या----

शनि का बारह राशियो में  गोचर काल लगभग 29 वर्ष साढ़े  दस मास का होता है।यदि हम इस समय को 30 वर्ष समझे तो  शनि का एक राशि मे रहने  का समय लगभग 2½ वर्ष  होता है।जब जन्म राशि(जन्म समय चंद्रमा जिस राशि मे हो)से बारहवे  भाव मे शनि गोचर वश आता है तब साढ़े साती शुरु होती है तथा शनि के जन्म  राशि तथा उससे दूसरे  भाव से निकलकर तीसरे भाव मे आ जाने तक रहती  है। इस प्रकार शनि जन्म राशि सहित तीन राशियो(द्वादश, चंद्र लग्न और द्वितीय) मे 7½ वर्ष  मे भ्रमण  कर लेता है।

ढैय्या---- जब शनि जन्म राशि से चतुर्थ  और अष्टम  स्थान मे आता है तो  इस गोचर को छोटी साढ़े साती या  ढैय्या कहा जाता है।यह 2½ वर्ष  की होती है तथा इसका  फल भी शनि की साढ़ेसाती   जैसा ही होता है।यहा भी कारण शनि की लग्न तथा द्वितीय  भाव पर द्रष्टि ही है।।
"जिन लोगो की कुंडलियो मे  शनि बलवान,उच्च,स्व्गृही,मित्रगृही या योग कारक होता है,उन  लोगो को शनि की साढ़ेसाती  मे विशेष  कष्ट नही होता ।इसके  विपरीत निर्बल और शत्रु  क्षेत्री शनि वाली  कुंडलियो मे शनि साढ़ेसाती, ढैय्या आदि  अवधि  मे विशेष अनिष्टकारी रह्ता है "

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar

मंगल का गोचर फल---‐

मंगल चंद्र  लग्न से गोचरवश 3,6 और 11 वे भाव में  शुभ फल देता है ।शेष भाव मै इसका फल अशुभ बताया गया है।
चंद्र  लग्न मै यदि गोचर वश मंगल हो तो उस समय कार्य  सफल नही होते है ।
व्यक्ति  ज्वर,घाव और रक्त विकार से  कष्ट उठाता है ।
आग,ज्वर  और हथियार से शरीर कष्ट की सम्भावना  होती है ।बवासीर  आदि  रोगो से  पीडित  होना पड्ता है ।स्त्री को भी ज्वर  आदि से कष्ट होता है ।दुर्जनो से कष्ट मिलता  है ।यात्रा  मै दुर्घटनाएं  होती है ।अन्य  भी कई  प्रकार  के उपद्रव  होते है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar

Sunday, March 22, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या बस चलाने का परमिट मिलेगा----

1--लग्न--लग्नेश शनि की चंद्रमा  से युति पर शुभ ग्रह गुरु की द्रष्टि है तो लग्न,अपने स्वामी से द्रष्ट होने के कारण,बहुत शुभ और  बली है ।
2--लाभस्थान  मै दशमेश शुक्र है तो लाभेश मंगल की,  उच्चराशिस्थ भाग्येश  बुध तथा राजा या सरकार  के नैसर्गिक कारक  सुर्य के साथ भाग्यस्थान  मै युति है।पुन: लाभेश का लाभात लाभम  होना भी कार्य सिद्धि को दर्शाता है।
निष्कर्ष--इस प्रश्नकर्ता को 1 महीने के अन्दर  परमिट मिल गया था ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Saturday, March 21, 2020

प्रश्न के अनुसार सामान की बिक्री कब होगी---

1--लाभेश उच्च्स्थ,स्व्छेत्रि या मित्रछेत्रि  हो कर लग्न या लग्नेश से सम्बंध करे ।

2--लाभेश या लाभ स्थान का द्रष्टि युति सम्बंध हो तो ऐसी परिस्तिथि  मै माल बेचना लाभदायक होता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Friday, March 20, 2020

प्रश्न के अनुसार यात्रा मैं विघ्न है या नही --

1--पंचम,सप्तम् या नवम भाव मै पाप ग्रह हो  तथा लग्न व लग्नेश पाप पीडित हो।
2--लग्न या लग्नेश से नवम तथा द्वादश भाव पाप ग्रह पर पाप ग्रह की द्रष्टि युति हो।
3--चन्द्रमा पापकर्तरि योग बनाकर  नवमेश से द्रष्टि युति करे तथा व्ययेश पाप पीडित हो ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Thursday, March 19, 2020

प्रश्न के अनुसार दुश्मन की विजय होगी या नही---

1--सप्तम भाव मै क्रुर ग्रह की उपस्तिथि तथा लग्न मै नीचराशिस्थ या अस्तगत  ग्रह होना शत्रु को विजय देता है।
2--च्तुर्थेश तथा सप्तमेश का द्रष्टि युति सम्बंध शत्रु की विजय कराता  है।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar

Wednesday, March 18, 2020

प्रश्न के अनुसार गर्भपात की स्थिति कब बनती है---

1--पंचम भाव मै पाप ग्रह की स्थिति या द्रष्टि तथा पंचमेश का दुस्थान मै बैठना गर्भ हानि  दे सकता  है ।
2-- प्रशं लग्न मै मंगल के साथ शनि  हो।
3--हीन  बली चन्द्रमा यदि मंगल,शनि से  द्रष्टि यति सम्बंध करे तथा शनि या मंगल  की राशि मैं  भी हो तो इसे गर्भपात  का संकेत  जाने।
4--यदि पंचमेश नीच राशि मै या पाप पीडित हो तो भी गर्भपात का संकेत जाने।
        
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Monday, March 16, 2020

प्रश्न के अनुसार वर या वधु का स्वभाव कैसा होगा___

1--सप्तम भाव  का स्वामी यदि शुभ ग्रह  हो या शुभ ग्रह का सम्बंध सप्तम भाव या सप्तमेश से हो तो वर या वधु सौम्य स्वभाव की,कार्यकुशल,सुन्दर तथा गुणी  होती  है।
2--सप्तम भाव या सप्तमेश का सम्बंध पाप ग्रह से होने पर जीवन साथी व्यवहार  कुशल,चतुर,थोडा उग्र स्वभाव,सुख,लोलुप व अधिकार  प्रिय होता है।कोई जताक स्वार्थी,क्रुर व आक्रमक  स्वभाव का हटी  व्यक्ति होता है ।

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Sunday, March 15, 2020

प्रश्न के अनुसार तलाक किस स्तिथि मै होता है_

1.सातवे स्थान में सूर्य हो तो पति द्वारा तलाक दिए जाने की संभावना रहती है।
2.सातवे स्थान में निर्बल पाप ग्रह हो और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो एक पति द्वारा तलाक दिया जाकर,दूसरे से विवाह करने की स्थिति अती है ।
3.सातवे स्थान में शुभ और पाप दोनों तरह के गृह योग हो तो पुनर्विवाह करने का योग होता है ।

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गोचर में सूर्य का फल___

यदि पंचमेश सूर्य निर्बल होकर व शनि तथा बुध के प्रभाव में होकर पंचम भाव में हो तो इस अवधि में मनुष्य को अपच रोग हो जाता है और स्मरण शक्ति भी कमजोर हो जाती है।यदि पाप प्रभाव अधिक हो तो पेट में अल्सर आदि असाध्य रोग होते है । राहु और शनि के प्रभाव में होकर पंचम में पंचमेश बार बार गर्भपात करवाता है।व्यक्ति को लाटरी , सट्टे आदि से सर्वदा हानि ही रहती है।जातक की पत्नी के बड़े भाई भी उसके विरूद्ध रहते है।
       
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Friday, March 13, 2020

प्रश्न उठता है कि ग्रहों को बली बनाने के लिए ,हवन या पूजन उचित है या नहीं __

ईश्वर व देवताओं का पूजन छोड़कर निर्जीव ग्रहों का पूजन कहीं मानवीय चिंतन,चेतना व विवेक का अपमान तो नहीं होगा ।सच तो ये है कि संसार उस एक रोशनी से जगमगा रहा है।चाहे किसी भी ढंग से करो पूजन परमात्मा का ही करता है चाहे किसी भी भाषा में करो ।
(1)महर्षि पाराशर ने कहा है कि यधपी अजन्मा भगवान वाशुदेव के अनेक अवतार है लेकिन सभी प्राणियों को कर्मफल देने वाले ग्रह रूप अवतार मुख्य है (पराशर होरा शास्त्र अवतार कथनाध्याए श्लोक 3)
सूर्य से राम ,चंद्रमा से कृष्ण ,मंगल से नृसिंह,बुध से गोतम बुद्ध ,गुरु से वामन,शुक्र से परशुराम,शनि से कच्छप,राहु से वाराह तथा केतु से मत्स्य के रूप में उस भगवान  के अवतार हुई है ( पाराशर होरा शास्त्र2:5व6)
अतः ग्रह पूजन मै निर्जीव ग्रह की पूजा उपासन नहीं है वरन् उस परम पिता ,सर्वशक्तिमान , सर्व नियंता की उपासना है जो ग्रहों का रूप धारण कर ,जीव को कर्मफल भोग कराता है  वास्तव में रोगों की आध्यात्मिक चिकित्सा है ।जिसमें ग्रहों के माध्यम से , उस ज्योति रूप परमात्मा से स्वास्थ्य ,सुख व समृद्धि की प्रार्थना की जाती है ।

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कुंडली विशेषज्ञ __Astroplus Durvesh kumar 

Thursday, March 12, 2020

मूर्छा रोग क्यों होता है इसके ज्योतिषीय कारण

(1) सूर्य+चंद्रमा+मंगल की युति लग्न या अष्टम भाव में हो तथा इस युति पर पाप ग्रह की दृष्टि हो।
(2) मंगल+शनि षष्ठ या अष्टम भाव में पाप दृष्ट हो।
(3) दु:स्थान में स्थित चंद्रमा की युति मंगल,शनि, राहु या केतु से हो।
(4) चंद्रमा +गुरु+शनि+राहु अष्टम भाव में हो ।
(5) चंद्रमा +शनि की युति पर मंगल की दृष्टि हो ।

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Wednesday, March 11, 2020

आखिर गूंगी बाहरी पुत्री क्यों होती है

(1)लग्न व लग्नेश__लग्न रही केतु अक्ष मै है ।अष्टमेश मंगल की लग्न व लग्नेश पर दृष्टि है।लग्नेश बुध पर राहू नियंत्रक बाधकेश गुरु की अशुभ दृष्टि अनिष्ट प्रद है ।
(2)द्वितीय भाव तथा द्वितीयेश__ द्वितीय भाव पर राहु युक्त अष्टमेश मंगल की दृष्टि है ।द्वितीयेश,पाप मध्यतव मै अष्टमस्थ है तथा बाधापती गुरु से दृष्ट है ।ये मूकत्व का संकेत देता है ।
(3)बुध__बुध पर रही युक्त अष्टमेश मंगल तथा राहु नियंत्रक गुरु की दृष्टि वाणी दोष का संकेत देती है ।
अर्थात द्वितीय भाव ,गुरु तथा बुध के पापत्व से ये बच्ची गूंगी बहरी है ।गुरु का पापत्व बहरापन देता है ।जल तत्व राशियां शनि,मंगल,राहु के कारण पापी हो गई।ये भी मूकता की पुष्टि करती है ।

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Tuesday, March 10, 2020

आखिर पागलपन क्यों होता है

(1)लग्न ____ राहु युक्त अष्टमेश मंगल, षष्ठ भाव से लग्न को देखता है।शनि से दृष्ट चंद्रमा की लग्न पर दृष्टि भी लग्न को कमजोर करती है।
(2)लग्नेश___लग्नेश मंगल षष्ठ स्थान मै राहु केतु अक्ष में बैठकर गंभीर रोग का संकेत देता है।
(3) षष्ठ भाव या श्ष्ठेश___लग्नेश का षष्ठस्थ होना ,षष्ठेश का नीचस्थ होकर व्यय भाव मै बैठकर लग्नेश को देखना तथा पचमेश षष्ठेश की व्यय भाव में युति तथा शनि की दृष्टि बुद्धि विकार का संकेत देती है ।
(4)चंद्रमा___चतुर्थेश होकर सप्तम भाव में शत्रु क्षेत्री है ।व्ययेश गुरु तथा बाधकेश शनि की ,चंद्रमा पर दृष्टि मानसिक रोग की पुष्टि कर रही है 
निष्कर्ष_____ चतुर्थ भाव मन की कोमल भावनाओं को दर्शाता है उस पर शनि व केतु की दृष्टि ने में को पीड़ीत किया ।पंचमेश का व्यय  भाव में षष्ठेश  से युति करना  मस्तिष्क विकार की पुष्टि करता है।लग्नेश का राहु से पीड़ीत होकर षष्ठस्थ होना भी पागलपन को दर्शा रहा है ।
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प्रश्न के अनुसार मुझे रतोंधी रोग तो नहीं आंखो में

रतोंधी रोग जानने के योग ___
(1) शुक्र+चंद्रमा की युति त्रिक भाव में हो ।
(2) द्वितीयेश +द्वादशेश+चंद्रमा+शुक्र की युति लग्न में हो ।।
               
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Monday, March 9, 2020

प्रश्न के अनुसार रोगी की मृत्यु होगी या नहीं

2,7,12 भाव में पाप ग्रह हो तथा 1,6,8भाव में चंद्रमा हो या चंद्रमा पाप ग्रहों के मध्यतव मै हो तो इससे ऐसा जाने की रोगी की मृत्यु बहुत ही जल्दी होने वाली है ।

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हर्ष योग कैसे बनता है

षष्ठेश दु:स्थान में स्थित होने से हर्ष योग बनता है ।ऐसा जातक पराक्रमी ,धर्मभीरू ,धनी व यशस्वी होता है 

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Sunday, March 8, 2020

प्रश्न के अनुसार रोगी ठीक नहीं हो रहा तो डाक्टर बदले या ना बदले ।

रोग प्रश्न मै लग्न डाक्टर है तो चतुर्थ भाव ओषधि या रोग का इलाज है ।सप्तम भाव रोग को व दशम भाव रोगी के व्यवहार को दर्शाता है।

(1) लग्न में यदि चर राशि पाप ग्रह से दृष्टि युति करे तथा लग्नेश नीचस्थ शत्रुछेत्री या अन्य प्रकार हीन बली हो तो ऐसे योग में डाक्टर की योग्यता पर प्रश्न चिह्न लगता है ।डाक्टर के कारण रोगी ठीक नहीं हो रहा है अतः डाक्टर बदलने मै ही भलाई है ।

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Saturday, March 7, 2020

प्रश्न के अनुसार जातक हत्यारा कब बनता है

(1)सप्तम भाव से तीन क्रूर ग्रहों का दृष्टि युति सम्बन्ध तथा सप्तमेश का हीन बली होना जातक को हत्यारा बनता है ।
(2) सप्तमेश बुध पापक्रंत होकर षष्ठ या अष्टम भाव में पाप कर्तरी योग में हो ।

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चोर पकड़ा जाएगा या नहीं ____

(१) लग्नेश का इत्थशाल सप्तमेश से होने पर 
(२)चन्द्रमा व सप्तमेश सूर्य से समान दूरी पर हो 
(३) लग्न की सप्तम भाव पर दृष्टि नहीं हो तो चोर जरूर पकड़ा जाएगा ।।

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Friday, February 28, 2020

दुरुधरा योग

परिभाषा__जब चन्द्र से द्वादश तथा द्वितीय स्थानों मै सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह स्थित हो तो दुरुधरा योग बनता है ।

परिणाम__दुरुधरा का फल योग बनाने वाले ग्रहों की प्रकृति,गुण ,स्वभाव पर निर्भर करता है। प्राय:
ऐसा मनुष्य सुख भोग करने वाला ,धनी होता है ।

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Saturday, February 22, 2020

How to wear Gems__

Nowadays people ask astrologers if this is my name or my zodiac sign, then we should wear which gemstone, then my advice to you is that before wearing the gemstone, you should show your horoscope with astrology properly, then why should you wear the gemstone according to it.

 Suppose your name is the zodiac sign, the owner is Mars, then you have taken coral, you are happy and the result is zero, why if your ascendant is in the horoscope, then the planet Mars will give negative results.  If the power is more then it will not give you good results, it will always give negative results, so before wearing the gemstone, show your horoscope with some good astrology.  After that Yogkark gem that should hold the assigning.

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रत्न धारण कैसे करे__

आजकल लोग ज्योतिषियों से पूछते है कि मेरा नाम या मेरी राशि ये है तो हम कोनसा रत्न धारण करे तो मेरी आपसे यही सलाह है कि रत्न धारण से पहले आप अच्छे से ज्योतिष से अपनी कुंडली दिखा ले फिर उसके बताए अनुसार ही रत्न धारण करे क्यों।
मान लो आपकी नाम राशि मैष है स्वामी हुआ मंगल तो आपने मूंगा धारण कर लिया आप खुश और रिजल्ट ज़ीरो ऐसा क्यों यदि आपकी वृष लग्न की कुंडली हो तो मंगल हुआ मारक ग्रह नकारात्मक रिजल्ट देगा पहले ही मंगल क्रूर ग्रह है उपर से मूंगा धारण कर लिया तो शक्ति और ज्यादा हो गई तो वो आपको अच्छे रिजल्ट नहीं देगा हमेशा नकारात्मक रिजल्ट देगा अतः रत्न धारण से पहले अपनी कुंडली किसी अच्छे ज्योतिष से दिखा ले उसके बाद जो योगकारक रत्न वो बताए वहीं धारण करना चाहिए।
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Thursday, February 20, 2020

चुगलखोर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार

1_लग्न का स्वामी पांचवे स्थान में जाए और उस पर शनि मंगल की दृष्टि हो।
2_लग्न का स्वामी पाप ग्रह हो।
3_लग्न पर पाप ग्रहों की दृष्टि अधिक हो।

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Wednesday, February 19, 2020

पुष्कल योग :_

परिभाषा__जब चन्द्र लग्न का स्वामी लग्न के  स्वामी के साथ केंद्र स्थान में,अपने अधिमित्र की राशि में स्थित हो और लग्न को कोई बलवान ग्रह देखता हो तो पुष्कल योग बनता है ।

परिणाम:-- इस योग में उत्पन्न  व्यक्ति धनवान,शुभ वाणी बोलने वाला भूषणो से भूषित आदि।
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कलानिधि योग

परिभाषा: जब गुरु द्वितीय या पंचम भाव में स्थित हो और बुध तथा शुक्र दोनों से युक्त या दृष्ट हो या गुरु,बुध या शुक्र के नवांश,राशि आदि में स्थित हो तो कलानिधि योग बनता है ।

फल : कलानिधि योग में पैदा होने वाला मनुष्य राज्य ऐश्वर्य  से युक्त तथा कलाओ में निपुण होता है ।
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शुक्र यदि सातवे भाव का स्वामी होकर बलवान हो व मेष लग्न हो तो शुक्र की दशा भुक्ती में विवाह सुख या  स्त्री भोग का योग होता है ,व्यापार वृद्धि होती है व धन बढ़ता है स्त्री वर्ग से तथा ससुराल से कुछ लाभ होता है ।
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