2--मंगल कर्क राशि मे नीचस्थ हो ।
3--षष्ट भाव तथा षष्ठेश का सम्बंध मंगल तथा अन्य पाप ग्रहो से भी हो ।
4--चंद्रमा मे मंगल की युति हो ।
इनमे से कोई भी योग होने पर रक्त पित्त रोग की सम्भावना बढ जाती है ।
सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar
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