Tuesday, March 24, 2020

शनि की साढ़े साती व ढैय्या----

शनि का बारह राशियो में  गोचर काल लगभग 29 वर्ष साढ़े  दस मास का होता है।यदि हम इस समय को 30 वर्ष समझे तो  शनि का एक राशि मे रहने  का समय लगभग 2½ वर्ष  होता है।जब जन्म राशि(जन्म समय चंद्रमा जिस राशि मे हो)से बारहवे  भाव मे शनि गोचर वश आता है तब साढ़े साती शुरु होती है तथा शनि के जन्म  राशि तथा उससे दूसरे  भाव से निकलकर तीसरे भाव मे आ जाने तक रहती  है। इस प्रकार शनि जन्म राशि सहित तीन राशियो(द्वादश, चंद्र लग्न और द्वितीय) मे 7½ वर्ष  मे भ्रमण  कर लेता है।

ढैय्या---- जब शनि जन्म राशि से चतुर्थ  और अष्टम  स्थान मे आता है तो  इस गोचर को छोटी साढ़े साती या  ढैय्या कहा जाता है।यह 2½ वर्ष  की होती है तथा इसका  फल भी शनि की साढ़ेसाती   जैसा ही होता है।यहा भी कारण शनि की लग्न तथा द्वितीय  भाव पर द्रष्टि ही है।।
"जिन लोगो की कुंडलियो मे  शनि बलवान,उच्च,स्व्गृही,मित्रगृही या योग कारक होता है,उन  लोगो को शनि की साढ़ेसाती  मे विशेष  कष्ट नही होता ।इसके  विपरीत निर्बल और शत्रु  क्षेत्री शनि वाली  कुंडलियो मे शनि साढ़ेसाती, ढैय्या आदि  अवधि  मे विशेष अनिष्टकारी रह्ता है "

            सद्गुरु  कृपा ज्योतिष केंद्र

कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar

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