2--चतुर्थ भाव की कुम्भ राशी मे लग्नेश मंगल पर सुर्य की द्रष्टि बटवारे मे या पिता से भूमि की प्राप्ति होती है।
3---केंद्र या त्रिकोण भाव मे चतुर्थेश का (गुरु +शुक्र) से द्रष्टि युति सम्बंध अपने परिश्रम या प्रयास से भूमि लाभ देता है ।
नोट---ज़मीन की खरीद मे लग्न खरीदार,चतुर्थ भाव भू संपदा ,सप्तम भाव विक्रेता तो दशम भाव सम्पत्ति का मूल्य होता है ।
सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ --Astroplus Durvesh kumar
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