(1)महर्षि पाराशर ने कहा है कि यधपी अजन्मा भगवान वाशुदेव के अनेक अवतार है लेकिन सभी प्राणियों को कर्मफल देने वाले ग्रह रूप अवतार मुख्य है (पराशर होरा शास्त्र अवतार कथनाध्याए श्लोक 3)
सूर्य से राम ,चंद्रमा से कृष्ण ,मंगल से नृसिंह,बुध से गोतम बुद्ध ,गुरु से वामन,शुक्र से परशुराम,शनि से कच्छप,राहु से वाराह तथा केतु से मत्स्य के रूप में उस भगवान के अवतार हुई है ( पाराशर होरा शास्त्र2:5व6)
अतः ग्रह पूजन मै निर्जीव ग्रह की पूजा उपासन नहीं है वरन् उस परम पिता ,सर्वशक्तिमान , सर्व नियंता की उपासना है जो ग्रहों का रूप धारण कर ,जीव को कर्मफल भोग कराता है वास्तव में रोगों की आध्यात्मिक चिकित्सा है ।जिसमें ग्रहों के माध्यम से , उस ज्योति रूप परमात्मा से स्वास्थ्य ,सुख व समृद्धि की प्रार्थना की जाती है ।
सदगुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ __Astroplus Durvesh kumar
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