(2) मंगल+शनि षष्ठ या अष्टम भाव में पाप दृष्ट हो।
(3) दु:स्थान में स्थित चंद्रमा की युति मंगल,शनि, राहु या केतु से हो।
(4) चंद्रमा +गुरु+शनि+राहु अष्टम भाव में हो ।
(5) चंद्रमा +शनि की युति पर मंगल की दृष्टि हो ।
सदगुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ __Astroplus Durvesh kumar
No comments:
Post a Comment