Wednesday, March 11, 2020

आखिर गूंगी बाहरी पुत्री क्यों होती है

(1)लग्न व लग्नेश__लग्न रही केतु अक्ष मै है ।अष्टमेश मंगल की लग्न व लग्नेश पर दृष्टि है।लग्नेश बुध पर राहू नियंत्रक बाधकेश गुरु की अशुभ दृष्टि अनिष्ट प्रद है ।
(2)द्वितीय भाव तथा द्वितीयेश__ द्वितीय भाव पर राहु युक्त अष्टमेश मंगल की दृष्टि है ।द्वितीयेश,पाप मध्यतव मै अष्टमस्थ है तथा बाधापती गुरु से दृष्ट है ।ये मूकत्व का संकेत देता है ।
(3)बुध__बुध पर रही युक्त अष्टमेश मंगल तथा राहु नियंत्रक गुरु की दृष्टि वाणी दोष का संकेत देती है ।
अर्थात द्वितीय भाव ,गुरु तथा बुध के पापत्व से ये बच्ची गूंगी बहरी है ।गुरु का पापत्व बहरापन देता है ।जल तत्व राशियां शनि,मंगल,राहु के कारण पापी हो गई।ये भी मूकता की पुष्टि करती है ।

            सदगुरु कृपा ज्योतिष केंद्र 
कुंडली विशेषज्ञ _Astroplus Durvesh kumar

No comments:

Post a Comment