(2)द्वितीय भाव तथा द्वितीयेश__ द्वितीय भाव पर राहु युक्त अष्टमेश मंगल की दृष्टि है ।द्वितीयेश,पाप मध्यतव मै अष्टमस्थ है तथा बाधापती गुरु से दृष्ट है ।ये मूकत्व का संकेत देता है ।
(3)बुध__बुध पर रही युक्त अष्टमेश मंगल तथा राहु नियंत्रक गुरु की दृष्टि वाणी दोष का संकेत देती है ।
अर्थात द्वितीय भाव ,गुरु तथा बुध के पापत्व से ये बच्ची गूंगी बहरी है ।गुरु का पापत्व बहरापन देता है ।जल तत्व राशियां शनि,मंगल,राहु के कारण पापी हो गई।ये भी मूकता की पुष्टि करती है ।
सदगुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
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