(2)नवम भाव मे क्रूर ग्रहो से दृष्टी या युति सम्बंध मे शनि हो तो प्रवासी रोग ग्रस्त हित है और यदि ऐसा शनि अष्टम भाव मे हो तो प्रवासी की मृत्यु होती है।
(3) चतुर्थ भाव मे नीचराशि मे स्थित वक्री ग्रह के साथ चंद्र्मा इत्थशाल करता हो और शुभ ग्रहो की द्रष्टि ना पड़ रही हो तो प्रवासी विदेश मे मर जाता है।
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