(1) मंगल,शनि या दु:स्थान के स्वामी अथवा दुस्थान मे बैठे ग्रह वक्री होने पर अधिक अशुभ व अनिष्टकारी हो जाते है।
(2) बुध,गुरु,शुक्र त्रिकोण मे हो या त्रिकोणेश ग्रह वक्री होने पर अधिक कल्याणकारी हो जाते है ।
(3) गोचर मे शुभ ग्रह का वक्री होना अधिकांश धन मान,यश व सत्ता का सुख दिया करता है।
(4) पाप ग्रह का वक्री होना धन व पद की हानि, असफलता और कभी कभी शत्रु का भय देता है ।
सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar
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