(1) पंचमेश तथा सप्तमेश की युति लग्न, पंचम,सप्तम या एकादश भाव मे हो ।
(2) पंचमेश,सप्तमेश का आपस मे दृष्टि विनिमय या राशि परिवर्तन हो।
(3) लग्नेश तथा सप्तमेश के मध्य दृष्टि युति सम्बंध या राशि परिवर्तन हो ।
(4) प्रश्न कुंडली मे चंद्रमा तथा शुक्र उच्चराशिस्थ या स्वगृही हो ।
(5) सप्तम भाव मे चंद्र्मा की लग्नेश से युति हो ।
इनमें से कोई भी योग होने पर जातक अपनी पसंद की पत्नि पाता है ।
सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh Kumar
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