(1) लग्न मे( चन्द्रमा+मंगल+शुक्र )या (चंद्रमा+शुक्र +शनि ) की युति तथा पंचम भाव पाप ग्रहो से दृष्ट या युक्त हो।
(2)लग्न मे मंगल या शनि की राशि के तथा चंद्र्मा व शुक्र की युति तथा उन पर पाप ग्रहो की दृष्टि हो ।
इनमें से कोई भी योग सन्तान की उत्पत्ति मे बाधक बनकर बांझपन दे दिया करता है।
सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar
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