Monday, July 19, 2021

सूर्य का अष्टम भाव मे शुभ या अशुभ फल क्या है ?

                                     सूर्य का शुभ व अशुभ फल  ;-


सूर्य का शुभ फल  -  सूर्य उच्च  या अपनी मित्र  राशि मे होकर  गुरु , बुध  आदि शुभ ग्रह  के साथ या  दृष्टि  मे हो तो 

 जातक  बुद्धिमान , मेहनती , धर्मशास्त्र व गुप्त विधाओ  को जानने  वाला होता है | ऐसा जातक परोपकारी  स्वभाव का

 होता  है | ऐसे जातक का विवाह के बाद  भाग्य  उदय होता है | ऐसे जातक को विदेशो या भ्रमण करने के अधिक

 अवसर प्राप्त होते है | 


सूर्य का अशुभ फल -  सूर्य शत्रु  राशि मे हो या शनि , राहू  आदि पाप  ग्रहो के साथ  या दृष्टि  संबंध  बनाता है तो

 जातक को  अपने हर एक  महत्वपूर्ण  कार्य विघ्न  व बाधाए  पैदा होती है | ऐसे जातक  को आर्थिक व पारिवारिक 

उलझनों  के कारण  मन मे चिंता  रहती है | ऐसे जातक का दांपत्य  जीवन  भी कलेशपूर्ण  रहता है | ऐसे जातक 

को  आंखो  मे कष्ट , गुप्त रोग  या दुर्घटना आदि से कष्ट की संभावना अधिक रहती है | 

Wednesday, February 24, 2021

सूर्य का सप्तम भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

                                                  सूर्य का शुभ व  अशुभ फल :-


(1) सूर्य का शुभ फल  -    मिथुन, तुला  व धनु लग्न मे उच्च राशि व  अपनी मित्र राशि मे सूर्य सप्तम भाव मे हो 

तो जातक स्वाभिमानी, परोपकारी , दिलेर होता है । यदि गुरु , मंगल  आदि ग्रह भी शुभ हो तो आर्थिक स्थिति 

मे स्त्री या पति से बहुत अधिक मात्रा मे लाभ मिलता है । ऐसे जातक का विवाह के बाद भाग्य उदय होता है । 

वृष, सिंह, कुम्भ  लग्न वाले जातको को मिलेजुले  फल मिलते है । 


(2) सूर्य  का अशुभ फल  -     मेष, कर्क , कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन लग्न के जातको को सप्तम मे स्थित सूर्य 

अशुभ या संघर्ष पूर्ण  हालत  प्रदान करता है । ऐसे जातक का अशुभ सूर्य होने के कारण  उच्च विधा  व  अपने 

 कैरियर को बनाने मे बहुत सारी बाधाओ के बाद सफलता मिलती है । ऐसे जातक के विवाह मे भी बहुत अधिक 

देरी होती है और जीवन साथी को भी कष्ट रहता है व दांपत्य  जीवन मे भी सुख की बहुत कमी होती है । ऐसे जातको

 का सूर्य यदि राहू/ शनि आदि पाप ग्रहो से द्रष्ट या युक्त हो तो आर्थिक व पारिवारिक परेशानिया बनी ही रहती है । 


Thursday, February 18, 2021

सूर्य का छठे भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

                                               सूर्य का छठे  भाव मे शुभ व अशुभ फल :-


(1) सूर्य का शुभ फल -     मीन , वृश्चिक, मेष , तुला  लग्नों मे छठे भाव मे अपनी राशि और मित्रराशि मे  स्थित होने 

पर जातक मेहनती, धैर्यवान , साहसी, गुणवान , मुकदमे या विवाद मे शत्रुओ पर जीत हासिल करने वाला 

गुप्त विधियो से धन इकट्ठा  करने वाला । ऐसे जातक का भाग्य उदय विदेश मे होता है । शुभ सूर्य होने से जातक 

की पाचन शक्ति  भी अच्छी होती है । 


(2) सूर्य का अशुभ फल -    छठे भाव मे   तुला, मकर , कुम्भ, या वृष राशि मे सूर्य अशुभ हो ओर शनि, राहू से कोई भी

 संबंध  हो तो जातक को मकान या वाहन संबन्धित सुख मे अड़चन होती है । मुकदमा या विवाद आदि कारणो से 

धन हानी होती है । ऐसे जातक को गुप्त शत्रुओ से भी डर बना रहता है । ऐसे जातक को रक्त रोग और दिल के रोग

 का भी डर  बना रहता है । कर्क, मकर और कुम्भ लग्न के जातको को छठे का सूर्य मिला जुला फल देता है । 

Friday, February 12, 2021

सूर्य का पंचम भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

                                                  सूर्य का शुभ व अशुभ फल :-


(1)  सूर्य का शुभ फल -    मेष, वृष, सिंह, वृश्चिक, धनु व कुम्भ लग्न के जातको के लिए अगर पंचम मे सूर्य अपनी राशि 

मित्रराशि  या अपनी उच्च राशि मे सूर्य होने से जातक तेज़ बुद्धि , अच्छा मान सम्मान ओर ऊचे लोगो से संपर्क होता है । 

यदि मंगल या गुरु से युति या दृष्टि संबंध हो तो जातक मेडिकल फील्ड  मे सफल होने का काफी अच्छा संकेत होता है 

और जातक को पुत्र संतति के बाद अच्छे भाग्य की भी उन्नति होती है । 


(2) सूर्य का अशुभ फल -   मिथुन, कन्या, मकर  लग्न के जातको को पंचम का सूर्य अशुभ फल देगा  और  कर्क, तुला

 व मीन लग्न के जातको को पंचम मे स्थित सूर्य शुभ व अशुभ दोनों प्रकार का फल देगा । यदि सूर्य राहू व शनि के साथ

 है तो अशुभ फल करेगा 

Sunday, February 7, 2021

सूर्य का चतुर्थ भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

                                                      सूर्य का शुभ व अशुभ फल :- 


(1) सूर्य का शुभ फल -       वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु व मकर लग्नों मे सूर्य यदि चतुर्थ भाव मे अपनी राशि,

मित्रराशि या अपनी उच्च राशि मे है तो शुभ फल देगा । जातक स्वाभिमानी  ओर सभी सुख सुविधाओ से युक्त 

होता है। भूमि या जायदाद से संबन्धित कार्यो मे अच्छा लाभ उठाने वाला होता है । 


(2)  सूर्य का अशुभ फल -    कर्क, तुला, वृश्चिक , मेष, कुम्भ व मीन लग्न वाले जातको को सूर्य अशुभ या शुभ , अशुभ 

 दोनों प्रकार  के प्रभाव का फल देगा । चतुर्थ भाव का सूर्य यदि नीचराशि या अपनी शत्रुराशी मे है तो मकान आदि के

 सुख मे कमी करेगा , माता पिता के लिए कष्ट कारक होगा ,जातक के सभी कार्यो मे विघ्न आते ही रहते है ,और सूर्य 

यदि किसी भी अशुभ ग्रह की द्रष्टि मे होगा  तो वाहन से संबन्धित दुर्घटना का डर हमेशा बना रहेगा । 

Thursday, February 4, 2021

सूर्य का तृतीय भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

                                          सूर्य का तृतीय भाव मे शुभ व अशुभ फल :-


(1) सूर्य का शुभ फल  -   तृतीय भाव मे सूर्य यदि मेष, वृष , मिथुन , कर्क, कन्या , तुला , मकर व कुम्भ 

लग्न मे स्वराशि , मित्रराशि या अपनी उच्च राशि मे स्थित हो तो जातक साहसी , दृढ़ निश्चय वाला , मेहनती 

अपने परिश्रम से धन अर्जन करने वाला, लेखन व धार्मिक कार्यो मे कुशल होता हैं । यदि सूर्य बुध व गुरु आदि 

शुभ ग्रह से युक्त या द्रष्टि मे हो तो जातक परोपकारी , धन - धान्य, भूमि , वाहन आदि सुखो से युक्त  होता है । 

और अपने कारोबार मे विशेष  उन्नति करता है । 


(2) सूर्य का अशुभ फल -   तृतीय भाव मे यदि सूर्य हो तो जातक चंचल बुद्धि , न्याय प्रिय , लेकिन ऐसे जातक को 

हर काम मे विघ्न बाधाए आती ही रहती है , जातक अशांत भी रहता है , ऐसा जातक कितनी भी भलाई करो फिर भी 

बुराई ही मिलती है , ऐसा जातक आर्थिक् स्थिति से भी परेशान ही रहता है । यदि सूर्य शनि , राहू आदि अशुभ ग्रहो

के साथ हो किसी भी स्थिति मे हो तो सूर्य की महादशा मे पिता के सुख मे कमी , शारीरिक कष्ट  और धन हानी  जैसे

 अशुभ फल होने लगते है । 

Sunday, January 31, 2021

सूर्य का द्वितीय भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

  सूर्य का  द्वितीय भाव मे शुभ व अशुभ फल :-


(1) सूर्य का शुभ फल  -  वृष , मिथुन,कर्क,सिंह, तुला, वृश्चिक , कुम्भ व मीन लग्न के जातक को सूर्य स्वराशि या 

अपनी मित्रराशि या अपनी उच्च राशि मे हो तो जातक बुद्धिमान ,भूमि, वाहन आदि सुखो से युक्त ओर स्वाभिमानी 

होता है । 


(2) सूर्य का अशुभ फल -    मेष, कन्या, धनु व मकर लग्न के जातको दूसरे भाव मे सूर्य शत्रु राशि मे या नीच राशि मे

 होने से जातक  को पारिवारिक कलेश , आर्थिक परेशानी , आय कम अधिक  होता है । भाग्य उन्नति मे विघ्न व बाधाए

 उत्पन्न होती ही रहती है ,अशांत चित्त , पिता को कष्ट , आँख व मुह के रोग होने का डर रहता है , वाहन से दुर्घटना का

 डर हमेशा बना रहता है । 

Friday, January 29, 2021

सूर्य का प्रथम भाव मे शुभ व अशुभ फल क्या है ?

                                     सूर्य का प्रथम भाव मे फल 


(1) सूर्य का शुभ फल - सूर्य प्रथम भाव मे  मेष, मिथुन, सिंह ,वृश्चिक  या धनु राशि मे हो तो जातक  पराक्रमी, पुष्ट शरीर ,

 आकर्षक  दिखने वाला , स्वतंत्र प्रकृति , अधिक बुद्धिमान , स्पष्टवादी , मिलनसार व हसमुख होगा । गुरु, मंगल व बुध

 ग्रह भी शुभ्स्थ  हो तो जातक उच्च ज्ञान रखने वाला , उच्च अधिकारियों से संबंध रखने वाला , एक से अधिक आय के

 स्त्रोत  तथा सभी सुखो से  परिपूर्ण  होता है ।


(2) सूर्य का अशुभ फल -   सूर्य प्रथम भाव मे यदि वृष , कर्क, कन्या , तुला,मकर, कुम्भ या मीन राशि मे हो ओर शनि,

 राहू,केतू  आदि ग्रह से द्रष्ट या युक्त हो तो जातक  क्रोधी , तेज़ स्वभाव , कटु वचन  बोलने वाला , अस्थिर विचार, 

 परिवार के साथ मनमुटाव ओर आर्थिक परेशानियों से परेशान रहता है । यदि कुंडली मे सूर्य अशुभ ग्रहो से युक्त 

हो तो सूर्य  कि दशा व अंतेर्दशा  मे जातक को उच्च रक्तचाप , सरकारी स्थानो से हानी , आंखो मे पीड़ा , उच्च विधा

 पाने मे बाधा , धन लाभ मे रुकावट , पत्नी व संतान को कष्ट , सिर दर्द , बुखार आदि अशुभ फल होते है । 

Tuesday, January 26, 2021

क्या संपत्ति मे उचित हिस्सा मिलेगा ?

 घर परिवार की संपत्ति या कारोबार के बटवारे मे हमारा उचित हिस्सा  मिलेगा ? जब जातक ऐसा प्रश्न  करे तो निम्न 

योगो पर जरूर ध्यान देना चाहिए । 


(1) अष्टम व द्वितीय भाव  मे यदि पापग्रह हो तो मुकदमा  या मार पिटाई की नौबत  आ जाती है । 


(2) लग्न व चंद्रमा दोनों चर राशि मे हो तो हिस्सा मिलने मे परेशानी होती है। 


(3) लग्न व चंद्रमा यदि पापग्रह से युक्त हो या पापग्रह की द्रष्टि मे हो तो वाद विवाद होना तो निश्चित है । 


(4) लग्न व सप्तम भाव मे यदि पापग्रह हो तो बेईमानी  करके सारा हिस्सा हड़प लिया जाता है । 


(5) यदि केंद्र , लाभ  व द्वितीय  भावो मे शुभ ग्रह हो तो उचित हिस्सा ईमानदारी से मिल जाता है ।

Saturday, January 23, 2021

व्यक्ति को क्रोध क्यो आता है ?

 जातक के क्रोधित होने के योग निम्न है -

(1) यदि जातक का जन्म दिन ( सूर्य लग्न से सप्तम भाव मध्य तक ) मे है ओर मंगल बली  लग्न या दशम भाव मे हो तो

 जातक को अधिक क्रोध आता है । 

(2) यदि जातक की कुंडली मे मंगल बली हो ओर सप्तम भाव मे स्थित हो तो भी जातक क्रोधित रहता है । 


(3) यदि चंद्र लग्नेश ( राशिश ) , हीन बली होकर त्रिकोण भाव मे हो तो भी जातक क्रोधित रहता है । 


(4) यदि जातक की कुंडली  मे लग्नेश अष्टम  या बारहवे  भाव मे स्थित हो तो भी जातक को अधिक क्रोध  आता है । 

Wednesday, January 13, 2021

क्या मेरा बच्चा मन्द बुद्धि तो नही है

 यदि बुध व चंद्रमा पर , पाप ग्रहो का प्रभाव हो तो बच्चा अधिक मेहनत करने के बाद भी बहुत कम ही सीख पाता है ।

 बच्चे की याददाश्त बहुत कमजोर होती है और बच्चे को नया कोई भी विषय सीखने मे बहुत ही ज्यादा ही मुश्किल 

होती है । 


मंदबुद्धि जातक के ज्योतिष के अनुसार निम्न  योग है --

(1) यदि कुंडली मे लग्न मे स्थित चंद्रमा पर शनि व मंगल की द्रष्टि पड़ रही है तो जातक के लिए मन्द बुद्धि योग बनता है । 


(2) यदि लग्नेश व पंचमेश दोनों ग्रह नीच राशि मे हो या किसी भी पाप ग्रह से युक्त हो तो जातक मन्द बुद्धि होता है । 


(3) यदि कुंडली मे पंचम भाव , पंचमेश , बुध व चंद्रमा पाप ग्रहो से किसी भी प्रकार से संबन्धित हो तो जातक मन्द बुद्धि होता है । 


(4) यदि कुंडली  मे पंचम भाव मे ( शनि + राहू ) की युति हो और  12 वे भाव बुध हो तथा पंचमेश ग्रहो से द्रष्ट हो या

 युक्त हो तो जातक की याददाश्त बहुत कमजोर होती  है । 



Tuesday, January 12, 2021

क्या गाने मे मेरा सुर सुधरेगा ?

 यदि निम्न योग प्रश्न कुंडली मे बनते  है तो किसी भी प्रकार के गायन  आदि मे आवाज़ अच्छी हो जाती है । 

(1) तृतीय से  केंद्र  ( 6,9,12 )   मे  बुध, गुरु स्थित हो । 

(2) तीसरे भाव से  बुध या गुरु या इन दोनों का कोई भी संबंध  बने  , तो भी अच्छी आवाज़ का योग बनता है । 

(3) यदि कुंडली मे  तृतीयेश  व मंगल का कोई भी संबंध बनता है तो ये भी अच्छी आवाज़ का योग  बनता है । 

Friday, January 1, 2021

आज मेरा काम काज कैसा रहेगा ?

 अच्छा काम काज चलने के निम्न योग है -

(1) यदि प्रश्न कुंडली मे लग्नेश व सप्तमेश का युति , द्रष्टि कोई भी संबंध बनता है तो अछे काम काज का योग है । 


(2) लग्नेश व सप्तमेश 4, 10 भावो मे नही होने चाहिए । 


(3) बुध , मंगल की राशि  1,7 भावो मे हो या ये इन भावो मे स्थित हो  तो अछे काम काज का योग बनता है । 


(4) प्रश्न कुंडली मे बुध व मंगल  का बलवान होना चाहिए , 

यदि उपरोक्त  योग मे से कोई भी योग बनता है तो काम काज अच्छा रहेगा ।