सूर्य का तृतीय भाव मे शुभ व अशुभ फल :-
(1) सूर्य का शुभ फल - तृतीय भाव मे सूर्य यदि मेष, वृष , मिथुन , कर्क, कन्या , तुला , मकर व कुम्भ
लग्न मे स्वराशि , मित्रराशि या अपनी उच्च राशि मे स्थित हो तो जातक साहसी , दृढ़ निश्चय वाला , मेहनती
अपने परिश्रम से धन अर्जन करने वाला, लेखन व धार्मिक कार्यो मे कुशल होता हैं । यदि सूर्य बुध व गुरु आदि
शुभ ग्रह से युक्त या द्रष्टि मे हो तो जातक परोपकारी , धन - धान्य, भूमि , वाहन आदि सुखो से युक्त होता है ।
और अपने कारोबार मे विशेष उन्नति करता है ।
(2) सूर्य का अशुभ फल - तृतीय भाव मे यदि सूर्य हो तो जातक चंचल बुद्धि , न्याय प्रिय , लेकिन ऐसे जातक को
हर काम मे विघ्न बाधाए आती ही रहती है , जातक अशांत भी रहता है , ऐसा जातक कितनी भी भलाई करो फिर भी
बुराई ही मिलती है , ऐसा जातक आर्थिक् स्थिति से भी परेशान ही रहता है । यदि सूर्य शनि , राहू आदि अशुभ ग्रहो
के साथ हो किसी भी स्थिति मे हो तो सूर्य की महादशा मे पिता के सुख मे कमी , शारीरिक कष्ट और धन हानी जैसे
अशुभ फल होने लगते है ।
No comments:
Post a Comment