Thursday, April 30, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या नौकरी बदलना उचित है --

नौकरी बदलना  उचित है या नही के योग निम्न हैं ।

(1)लग्न से द्वितीय,सप्तम व अष्टम  भाव मे पाप ग्रह की स्थिति  होने पर नौकरी बदलना  उचित है।कारण  लग्न से 2,7,8 वे भाव  मे पाप ग्रह स्वामी व सेवक दोनो के लिये अनिष्ट है।

(2)यदि लग्नेश केंद्र मे बैठकर षष्ठेश या व्ययेश से द्रष्टि युति करे तो दूसरे मलिक से धन लाभ होगा ऐसा जाने।
(3)लग्न मे शीर्षोदय  व चर राशि तथा लग्नेश का बली होना भी दुसरी नौकरी से धन लाभ या पद  की उन्नति होने का संकेत देता है।

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कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh kumar 

Wednesday, April 29, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरा स्वास्थ्य लाभ कैसा है--

स्वास्थ्य  लाभ के कुछ प्रमुख योग निम्न है ।

(1) यदि प्रश्न कुंडली का लग्नेश बली हो तथा शुभ ग्रह उच्च  या त्रिकोण राशि के होकर केंद्र मे बैठे हो।

(2)लग्न मे बैठा  कोई भी शुभ ग्रह चन्द्र्मा से दृष्टि  सम्बंध  करे ।

(3)केंद्र,त्रिकोण  व अष्टम भाव मे शुभ ग्रह हो तथा चंद्रमा उपचय  भाव मे हो ।

(4)लग्न व चन्द्रमा का सम्बंध शुभ ग्रहो से हो या लग्न और चंद्र्मा पर शुभ दृष्टि हो तो भी स्वास्थ  अच्छा रह्ता है।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Tuesday, April 28, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या मुझे वाहन सुख प्राप्त होगा--

वाहन लाभ के योग निम्न है ---

(1) यदि द्वितीयेश  लग्न मे,दशमेश  धन भाव मे तथा चतुर्थ  भाव मे कोई ग्रह उच्च  राशि मे हो  तो वाहन लाभ होता है।

(2)लग्न, नवम या लाभ स्थान मे लग्नेश चतुर्थेश  की युति पर चंद्रमा की द्रष्टि हो  तो भी वाहन लाभ होता है।
(3)लग्नेश, धनेश,तथा चतुर्थेश  का आपस मे सम्बंध  हो तो भी वाहन  लाभ होता है।

(4)लग्न या चतुर्थ भाव  मे( शुक्र + चतुर्थेश )  की युति हो तो भी वाहन  सुख होता है।

(5) नवमेश+दशमेश + एकादशेश)की युति चतुर्थ भाव मे हो तो  भी उत्तम वाहन सुख प्राप्त  होता है।

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कुंडली विशेषज्ञ -Astroplus Durvesh Kumar 

Monday, April 27, 2020

डायबीटिज के ज्योतिषीय योग--

डायबीटिज  के ज्योतिषीय  योग निम्न  है।

(1) गुरु यदि शनि की राशि अथवा नक्षत्र मे हो और पाप ग्रह से दृष्ट हो ।

(2) गुरु पर शनि की द्रष्टि युति हो ।

(3)चंद्रमा या कर्क राशि से शनि  द्रष्टि युति करे ।

(4)राहु की अष्टमेश  से अष्टम या त्रिकोण मे युति  हो ।
 (5)अष्टम भाव पाप युक्त तथा चंद्रमा, गुरु व शुक्र मे से कोई 2 ग्रह पापी  हो तो  डायबीटिज  के लक्षण  बनते  है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar 

Sunday, April 26, 2020

ग्रहो के रत्न और धातु --

 ग्रहो के रत्न व धातु निम्न हैं----

ग्रह---     रत्न   ---  धातु 
सूर्य----- माणिक-- तांबा 
चंद्र----- मोती------ चांदी 
मंगल--- मूँगा------- तांबा, सोना 
बुध----- पन्ना------- सोना,चांदी,काँसा 
गुरु----- पुखराज--- सोना 
शुक्र---- हीरा-------- चांदी
शनि---- नीलम----- लोहा 
राहु----- गोमेद----- रांगा ,सोना 
केतु ---- लह्सनिया-- सोना,काँसा 

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh  Kumar

Saturday, April 25, 2020

प्रश्न के अनुसार चोरी किया हुआ धन कहा छिपा है-

धन कहा छिपा है निम्नलिखित  योग से जाने--
(1) - लग्न मे चर राशि होने पर माल घर से बाहर  कही दूर है।
(2)-लग्न मे चर या द्विस्वभाव राशि हो तो चतुर्थ भाव मे स्थित  ग्रह  से धन की सही स्थिति  जानी  जाती है ।:-
सूर्य से--घर के स्वामी   के बैठने के स्थान  पर ।
चंद्रमा  से--जलाशय या पानी की टंकी के पास।
मंगल से-- अग्नि शाला या चूल्हे के पास ।
बुध से--  पुस्तकालय  या स्कूल  के पास  या अनाज गोदाम  के पास होती है।
गुरु से-- मन्दिर या बगीचे मे ।
शुक्र से-- शयनकक्ष  या जनाना  घर मे ।
शनि से--कही भी कबाड या  कूडे  के ढेर मे  धन का छिपा होना जाने ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh Kumar 

Friday, April 24, 2020

ज्योतिष के अनुसार विवाह के अभाव का योग

विवाह के अभाव का योग निम्न है--

परिभाषा--जब सप्तम भाव,सप्तमेश तथा शुक्र  तीनों  पीड़ित  तथा निर्बल  हो और इनमें किसी के ऊपर  भी  कोई शुभ युति अथवा द्रष्टि न हो तो जातक को पत्नी की प्राप्ति नही होती है ।

हेतु-- यहां  सिद्ध हो गया की विवाह के तीनों  अंग  निर्बल होने से विवाह ना होगा ।

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कुंडली विशेषज्ञ --Astroplus Durvesh kumar 

Thursday, April 23, 2020

ज्योतिष के अनुसार मनुष्य आलसी क्यो होता है।

आलसी होने के योग निम्न है----
1--लग्न का स्वामी शनि के साथ बैठा हो तो जातक आलसी होता है।
2--लग्न पर पाप  ग्रहो  की द्रष्टि हो तब भी जातक आलसी किस्म का होता है।
3--गुरु और शनि किसी भी भाव मे एक साथ  बैठे हो तो भी जातक आलसी किस्म का होता है ।

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कुंडली विशेषज्ञ -Astroplus Durvesh kumar 

ग्रहो के कारकत्व,रंग और गुण---

(1) ग्रहो के कारकत्व ---

सूर्य---------‐‐ आत्मा
चंद्रमा--------मन
मंगल--------बल
बुध----------वाणी 
गुरु----------ज्ञान 
शुक्र---------कामवासना 
शनि--------दुख

(2) ग्रहो के रंग---

सूर्य------------नारंगी 
चंद्र------------क्रीम 
मंगल---------लाल
बुध-----------हरा 
गुरु-----------पीला
शुक्र----------सफेद(पारदर्शी)
शनि----------काला,नीला

(3) ग्रहो के गुण-----

सूर्य,चंद्र,गुरु----------सात्विक 
शुक्र,बुध--------------राजसी 
मंगल,शनि------------तामसी 

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Tuesday, April 21, 2020

भास्कर योग कैसे बनता हैं--

परिभाषा--सूर्य से बुध दूसरे स्थान मे हो बुध से चंद्रमा  एकादश  स्थान मे हो,चन्द्र्मा से गुरु त्रिकोण (नवम भाव ज्यादा  अच्छा है) में  हो तो भास्कर  योग बनता  है ।
फल--भास्कर  योग मे जन्म  लेने वाले जातक  शूरवीर,शास्त्रो को जानने  वाला,रूपवान  गाने का शौकीन ,ज्ञानी,  धनी,धीर तथा समर्थ होता है ।

Monday, April 20, 2020

ज्योतिष के अनुसार लंगड़ेपन के योग--

लंगड़े पन के योग निम्न है---
1--बुध,शनि,राहु कि युति दशम भाव मे हो तो पैर के कटने का डर  रह्ता है।

2--पूर्ण चंद्रमा,मंगल षष्टस्थान मे हो,व्यय भाव  मे स्थित  सूर्य से द्रष्ट हो  तो लंगड़े पन का संकेत देता है।
3--अष्टमेश,नवमेश,पापग्रह  कि युति चतुर्थ भाव मे हो तो लंगड़े पन का संकेत  देता है ।


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Sunday, April 19, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरा प्रेम विवाह होगा या नही --

1-- यदि चंद्रमा 3,6,10,11 वे भाव या सप्तम भाव मे  शुभ ग्रह कि राशि मे स्थित होकर बुध,गुरु,सूर्य या शुक्र से द्रष्टि युति सम्बंध  करे ।
2--लग्नेश और सप्तमेश का आपस मे राशि परिवर्तन हो।सप्तमेश  विवाह का कारक होकर  लग्न मे हो और लग्नेश सप्तम भाव मे हो तो बहुत ही शुभ है।
3--लग्नेश और व्ययेश का आपस मे द्रष्टि युति या स्थान परिवर्तन  सम्बंध  हो ।

इनमें  से कोई भी योग हो तो प्रेम विवाह मे सफलता जरुर मिलती है ।

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कुंडली विशेषज्ञ--Astroplus Durvesh kumar 

Saturday, April 18, 2020

विवाह सुख मे बाधक कुछ अरिष्ठ योग--

1--सप्तमेश  अशुभ ग्रह से युक्त हो या शुभ नीच राशिस्थ  हो,अथवा सप्तम भाव मे  पाप ग्रह का योग अथवा द्रष्टि हो तो पुरुष या स्त्री के विवाह में  या वैवाहिक  जीवन मे उलझनें व परेशानिया  खडी हो जाती है ।

2--सातवें  भाव मे राहु के साथ चंद्रमा ,मंगल का सम्बंध हो तो भी स्त्री के कारण कष्ट होता  है।।

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Thursday, April 16, 2020

क्या खोयी हुई वस्तु मिलेगी या नही--

नक्षत्रो के अनुसार ----
1--अन्धाक्ष नक्षत्रो मे गुम हुईं  अथवा चोरी हुई  वस्तु पूर्व दिशा कि और जाती है और उसकी  पुन: प्राप्ति कि शीघ्र  सम्भावना  रहती है ।
2--सुलोचन  नक्षत्रो  मे गुम हुई  वस्तु उत्तर  दिशा मे जाती है परंतु उसका न तो पाता चलता है और न ही प्राप्त होती हैं ।
3-- मध्याक्ष नक्षत्र  मे खोयी वस्तु  पश्चिम दिशा कि और बहुत दूर चली जाती है पता  चलन पर भी नही प्राप्त होती है।
4--मन्दाक्ष नक्षत्र  मे गुम अथवा चोरी हुई वस्तु दक्षिण कि और चली जाती है  तथा अत्याधिक  प्रयत्न करने  पर  अन्त मे प्राप्त हो जाती है।
                  
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Tuesday, April 14, 2020

प्रश्न के अनुसार क्या हमे जुडवा सन्तान प्राप्त होगी --

जुडवा सन्तान होने के योग --
1--प्रश्न  कुंडली के चार स्थानो पर 2-2 ग्रहो कि स्थिति जुडवा सन्तान का संकेत देती हैं ।
2--प्रश्न  लग्न मे द्विस्वभाव  राशि हो तथा लग्न या पंचम भाव मे शुभ ग्रहो कि युति हो तो जुडवा सन्तान जाने ।
3--गर्भाधान  या प्रश्न  के समय  सूर्य,चंद्र,मंगल गुरु,और  शुक्र  यदि द्विस्वभाव राशि या द्विस्वभाव नवमांश  मे हो तो इसे जुडवा सन्तान जन्म का संकेत जाने ।।

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Sunday, April 12, 2020

मन्द बुद्धि जातक के ज्योतिषीय योग --

1--लग्न मे पाप ग्रहो कि स्थिति या द्रष्टि हो तथा पंचमस्थ शनि लग्नेश से द्रष्टि  युति सम्बंध  करे तो जड़  बुद्धि योग बनता  है।
2--पंचम भाव मे शनि +राहु कि युति,बुध द्वादश  भाव मे हो तथा पंचमेश पाप ग्रहो से युक्त या द्रष्ट हो तो स्मरण  शक्ति  दुर्बल होती है ।
3--लग्नेश व पंचमेश दोनो ग्रह नीचस्थ,शत्रु  क्षेत्री या पाप युक्त हो तो जातक मन्द बुद्धि होता है।
4--लग्नस्थ चन्द्र्मा पर शनि व मंगल कि द्रष्टि हो ।

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Thursday, April 9, 2020

प्रश्न के अनुसार मेरा सन्तान सुख कैसा है--

प्रश्न  कुंडली मे पंचम भाव को सन्तान का कारक भाव माना  गया है ।

1--यदि चंद्रमा अथवा लग्नेश पंचम स्थान मे हो ।

2--पंचमेश लग्न भाव मे स्थित हो ।
3--लग्नेश तथा पंचमेश कि युति लग्न अथवा पंचम भाव मे हो 
इनमे से कोई भी योग उत्तम सन्तान सुख का संकेत देता है ।

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Monday, April 6, 2020

प्रश्न के अनुसार नौकरी मे बाधा क्यो हैं---

1--प्रश्न कुंडली मे  लग्नेश व दशमेश का सम्बंध 6,8,12वे भाव या इनके  स्वामियो से होना विघ्न बाधा या कार्य  हानि  को दर्शाता है ।
2--दशम भाव का मन्द गति  ग्रह (शनि,राहु) से सम्बंध तथा लग्नेश व चंद्रमा का हीन बली होना आजीविका  प्राप्ति मे बाधा देता है ।
3--लग्नेश व दशमेश का पाप ग्रस्त होकर 6,8 वे भाव मे होना भी नौकरी  का निषेध दर्शाता है ।
4--लग्नेश व दशमेश चतुर्थ भाव मे स्थित वक्री ग्रह या मन्द गति ग्रह शनि या राहु से सम्बंध करे तो लगी हुई नौकरी  छूटने का भय  होता है ।

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अनिद्रा के ज्योतिष्य योग ---

अनिद्रा के प्रमुख योग निम्न प्रकार हैं---

1--लग्न में  नीच राशिस्थ शनि पर सूर्य  कि द्रष्टि हो ।
2--लग्न मे स्थित  सूर्य या चंद्रमा का मंगल-शनि से द्रष्टि युति सम्बंध  हो ।
3--सप्तम भाव मे नीच राशि का शनि या मंगल,लग्न,लग्नेश, या सुर्य  व चन्द्र्मा से द्रष्टि युति सम्बंध करे ।

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Saturday, April 4, 2020

रक्त पित्त रोग के ज्योतिषीय कारण--

1--मंगल सप्तम भाव मे स्थित  हो।
2--मंगल कर्क  राशि  मे नीचस्थ  हो ।
3--षष्ट भाव तथा  षष्ठेश  का सम्बंध मंगल तथा अन्य  पाप ग्रहो से भी हो ।
4--चंद्रमा मे मंगल  की युति हो ।

इनमे से कोई भी योग होने पर रक्त पित्त रोग की सम्भावना बढ जाती है ।

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Friday, April 3, 2020

मस्तिष्क गांठ के ज्योतिषय योग--

1---  बुध शत्रु स्थान या हीन बली होकर,मंगल  या शनि से युक्त  या दृष्ट हो ।
2--सूर्य या चन्द्र्मा मे साथ,मंगल लग्न्स्थ  होकर पाप द्रष्ट हो ।
3--सूर्य,चंद्रमा,मंगल की युति,अष्टम भाव मे हो तथा पाप ग्रह अष्टम भाव से देखे।
4--चंद्रमा ,मंगल व शनि के साथ अष्टमसथ  हो ।
5--लग्नेश व मंगल  की युति  त्रिक  स्थान मे हो।

इनमें  से कोई भी योग मस्तिषक  मे गांठ  या  फोडा  दे सकता है।

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Wednesday, April 1, 2020

स्त्री दुराचारिणी किस कारण होती हैं--

1--यदि शुक्र  द्वितायेश होकर राहु से युक्त  हो तो ऐसी स्त्री दुराचारिणी  होती हैं ।
2--यदि मंगल द्वितायेश  होकर शनि से युक्त हो तो ऐसे स्त्री दुराचारिणी  होती हैं ।
3--यदि अष्टम भाव मे मंगल हो तो ऐसी स्त्री व्यभिचाराणि  होती है ।
4--यदि अष्टम भाव मे राहु हो तो ऐसी स्त्री धर्म विहीन  व पुरुष गामिनी होती है ।

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पति त्याग योग क्या है--

1--यदि सप्तम भाव मे 1 पाप ग्रह बलहीन  बैठा हो तथा उस पर किसी शुभ ग्रह की द्रष्टि  भी ना हो तो ऐसी स्त्री को उसका पति त्याग  देता है।

2--यदि सप्तम भाव मे सूर्य ,मंगल तथा शनि हीनबली  हो और वे शुभ ग्रह से दृष्ट भी हो तो ऐसी स्त्री को उसका पति त्याग देता है ।

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