(1)लग्न से द्वितीय,सप्तम व अष्टम भाव मे पाप ग्रह की स्थिति होने पर नौकरी बदलना उचित है।कारण लग्न से 2,7,8 वे भाव मे पाप ग्रह स्वामी व सेवक दोनो के लिये अनिष्ट है।
(2)यदि लग्नेश केंद्र मे बैठकर षष्ठेश या व्ययेश से द्रष्टि युति करे तो दूसरे मलिक से धन लाभ होगा ऐसा जाने।
(3)लग्न मे शीर्षोदय व चर राशि तथा लग्नेश का बली होना भी दुसरी नौकरी से धन लाभ या पद की उन्नति होने का संकेत देता है।
सद्गुरु कृपा ज्योतिष केंद्र
कुंडली विशेषज्ञ-- Astroplus Durvesh kumar