Tuesday, September 20, 2022

मेष से मीन राशि तक मंगल की महादशा का परिणाम ( कालखंड 7 वर्ष )

  मेष राशि -   मेष राशि का मंगल अपनी मूल त्रिकोण राशि मे होने के कारण मान सम्मान व धन की प्राप्ति 

करवाता है | और कभी  कभी अधिक पीड़ा भी दे दिया करता है |


वृष राशि -  वृष राशि का मंगल धन लाभ मे वृद्धि के साथ साथ रोग या पीड़ा मे भी वृद्धि कर दिया करता है |

गुप्त दान या परोपकार के कार्य करने के कारण जातक को कार्यो मे सफलता  व सम्मान मे वृद्धि भी हो जाती है |



मिथुन राशि -  मिथुन राशि का मंगल अपनी दशा मे जातक के साहस व पराक्रम की भी वृद्धि करता है |इस दशा मे

 कभी कभी जातक कान से संबन्धित कष्ट भी पाता है |


कर्क राशि -  कर्क राशि का मंगल अपनी दशा मे जातक को घर परिवार से मतभेद या अलगाव भी करवा दिया करता

है |इस दशा मे जातक को मानसिक पीड़ा की भी संभावना बढ़ जाया करती है और कभी कभी जातक इस अवधि 

मे धन लाभ की प्राप्ति भी कर लेता है |



सिंह राशि -  सिंह राशि का मंगल अपने कालखंड मे बुद्धिमान व तर्क मे कुशल भी बनाता है |कभी कभी इस दशा 

मे जातक का अपने लाइफ पार्टनेर के प्रति अधिक पीड़ा भी हो जाया करती है |



कन्या राशि - कन्या राशि का मंगल कालपुरुष कुंडली मे छटे भाव का स्वामी होने के कारण धन धान्य की वृद्धि भी

 करवा देता है | इस कालखंड मे जातक प्रतियोगिता मे भी सफलता को प्राप्त करता है |



तुला राशि - तुला राशि का मंगल इस कालखंड मे धन व स्त्री सुख मे भी कमी किया करता है |इस स्थिति मे जातक 

अपने पार्टनर से या पार्टनर के लिए लड़ाई झगड़ा भी कर लिया करता है |


वृश्चिक राशि - वृश्चिक राशि का मंगल अपनी दशा मे धन धान्य का सुख भी प्राप्त करा दिया करता है | ऐसे जातक

 को अग्नि  या शस्त्र से भी हानी हो जाया करती है |


धनु राशि - धनु राशि का मंगल अपनी दशा मे धन व मान सम्मान दे देता है |इस अवधि मे जातक अपने कार्य व

 यक्ति  मे बहुत कुशल हो जाया करता है |



मकर राशि - मकर राशि मे उच्च का होने के कारण मंगल  अपनी दशा मे राज सुख , धन और कार्ये सिद्धि मे 

सफलता भी करता है |



कुम्भ राशि - कुम्भ राशि का मंगल अपनी दशा मे अशुभ परिणाम भी दे देता है |  इस अवधि मे जातक रोगी व

 दुराचारी  भी हो जाता है |



मीन राशि - मीन राशि का मंगल अपनी दशा मे शारीरिक कष्ट  देता है | कभी कभी त्वचा संबन्धित रोग भी दे देता 

है | कालपुर्ष कुंडली  के व्यय भाव मे होने के कारण कर्ज़ व पत्नी को कष्ट की संभावना भी अधिक बनी रहती है |

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