सूर्य का शुभ फल - जब सूर्य मित्र , उच्च या स्वराशि का होकर नवम भाव मे हो तो जातक भाग्य शाली ,
धर्मपरायण व माता पिता का सेवक होता है | मंगल गुरु आदि से द्रष्ट हो तो डॉक्टर आदि कार्यो मे सफल होता है |
अशुभ सूर्य का फल - यदि ये सूर्य पाप ग्रह से युक्त या द्रष्टि मे हो तो पिता व भाइयो से संबंध अच्छे नहीं होंगे ,
शारीरिक कष्ट व पारिवारिक व आर्थिक उलझनों से भी परेशान हो सकता है |कारोबार मे भी ऐसा जातक कुछ
ठीक नहीं कर पाता , भाग्य मे विफलता सी बनी रहती है |
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