Friday, February 28, 2020

दुरुधरा योग

परिभाषा__जब चन्द्र से द्वादश तथा द्वितीय स्थानों मै सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह स्थित हो तो दुरुधरा योग बनता है ।

परिणाम__दुरुधरा का फल योग बनाने वाले ग्रहों की प्रकृति,गुण ,स्वभाव पर निर्भर करता है। प्राय:
ऐसा मनुष्य सुख भोग करने वाला ,धनी होता है ।

सदगुरु कृपा ज्योतिष केंद्र 
कुंडली विशेषज्ञ :_Astroplus Durvesh kumar 
Email__durveshbanda@gmail.com

Saturday, February 22, 2020

How to wear Gems__

Nowadays people ask astrologers if this is my name or my zodiac sign, then we should wear which gemstone, then my advice to you is that before wearing the gemstone, you should show your horoscope with astrology properly, then why should you wear the gemstone according to it.

 Suppose your name is the zodiac sign, the owner is Mars, then you have taken coral, you are happy and the result is zero, why if your ascendant is in the horoscope, then the planet Mars will give negative results.  If the power is more then it will not give you good results, it will always give negative results, so before wearing the gemstone, show your horoscope with some good astrology.  After that Yogkark gem that should hold the assigning.

Astroplus Durvesh Kumar 
Sadguru kripa jyotish kendra 
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रत्न धारण कैसे करे__

आजकल लोग ज्योतिषियों से पूछते है कि मेरा नाम या मेरी राशि ये है तो हम कोनसा रत्न धारण करे तो मेरी आपसे यही सलाह है कि रत्न धारण से पहले आप अच्छे से ज्योतिष से अपनी कुंडली दिखा ले फिर उसके बताए अनुसार ही रत्न धारण करे क्यों।
मान लो आपकी नाम राशि मैष है स्वामी हुआ मंगल तो आपने मूंगा धारण कर लिया आप खुश और रिजल्ट ज़ीरो ऐसा क्यों यदि आपकी वृष लग्न की कुंडली हो तो मंगल हुआ मारक ग्रह नकारात्मक रिजल्ट देगा पहले ही मंगल क्रूर ग्रह है उपर से मूंगा धारण कर लिया तो शक्ति और ज्यादा हो गई तो वो आपको अच्छे रिजल्ट नहीं देगा हमेशा नकारात्मक रिजल्ट देगा अतः रत्न धारण से पहले अपनी कुंडली किसी अच्छे ज्योतिष से दिखा ले उसके बाद जो योगकारक रत्न वो बताए वहीं धारण करना चाहिए।
कुंडली विशेषज्ञ__Astroplus Durvesh Kumar 
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Thursday, February 20, 2020

चुगलखोर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार

1_लग्न का स्वामी पांचवे स्थान में जाए और उस पर शनि मंगल की दृष्टि हो।
2_लग्न का स्वामी पाप ग्रह हो।
3_लग्न पर पाप ग्रहों की दृष्टि अधिक हो।

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कुण्डली विशेषज्ञ_ Astroplus Durvesh kumar 
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Wednesday, February 19, 2020

पुष्कल योग :_

परिभाषा__जब चन्द्र लग्न का स्वामी लग्न के  स्वामी के साथ केंद्र स्थान में,अपने अधिमित्र की राशि में स्थित हो और लग्न को कोई बलवान ग्रह देखता हो तो पुष्कल योग बनता है ।

परिणाम:-- इस योग में उत्पन्न  व्यक्ति धनवान,शुभ वाणी बोलने वाला भूषणो से भूषित आदि।
कुंडली विशेषज्ञ_Astroplus Durvesh kumar
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कलानिधि योग

परिभाषा: जब गुरु द्वितीय या पंचम भाव में स्थित हो और बुध तथा शुक्र दोनों से युक्त या दृष्ट हो या गुरु,बुध या शुक्र के नवांश,राशि आदि में स्थित हो तो कलानिधि योग बनता है ।

फल : कलानिधि योग में पैदा होने वाला मनुष्य राज्य ऐश्वर्य  से युक्त तथा कलाओ में निपुण होता है ।
Astroplus Durvesh kumar 

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शुक्र यदि सातवे भाव का स्वामी होकर बलवान हो व मेष लग्न हो तो शुक्र की दशा भुक्ती में विवाह सुख या  स्त्री भोग का योग होता है ,व्यापार वृद्धि होती है व धन बढ़ता है स्त्री वर्ग से तथा ससुराल से कुछ लाभ होता है ।
Astroplus Durvesh kumar