Sunday, November 15, 2020

भाग्य शाली रत्न का चयन कैसे करे -

मैने अपने ऊपर सभी रत्नो का  प्रयोग किया ओर उनका अच्छा बुरा दोनो ही तरह का परिणाम अनुभव किया ,अन्त मे  मै इस निर्णय पर पहुँचा हू की रतन कभी  ग्रह के सकारत्मक या नकरात्मक  को ना देखकर पहने, क्योकी यदि ग्रह आपकी कुंडली के अनुसार सकारत्मक है तो ये जरुरी नही की वो परिणाम अच्छे ही देगा ।परिणाम निर्भर करता है महादशा स्वामी पर,क्योकी मैने खुद अनुभव किया है की महादशा स्वामी 70% परिणाम देता है ओर 20%परिणाम अन्तर्दशा स्वामी ओर 5% परिणाम प्र्त्यनतर दशा स्वामी ओर 5% सूक्ष्म दशा स्वामी परिणाम देता है। अब बात अति है की भाग्य रत्न का चयन कैसे करे सबसे पहले महादशा नाथ को देखो की वो किन किन भावो (घरो) का कार्येश है तो जिन भावो से  दशा स्वामी संबंद्ध करता है ओर वो भाव अच्छे परिणाम देने वाले है तो दशा स्वामी का रत्न धारण करे निश्चय ही आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे ओर यदि दशा नाथ अच्छे भावो का कार्येश नही है तो महा दशा नाथ को छोडकर  फिर ये देखो की  नक्षत्र के माध्यम से  कौन सा ग्रह आया है यदि ये ग्रह भी अच्छे भावो  का कार्येश नही  है तो इसे भी छोड दो फिर उप नक्षत्र स्वामी को देखो यदि ये भी अच्छे भाव का कार्येश नही है छोड दो इसे भी, फिर दृष्टी देखो यदि ये भी सही नही तो युति देखो  कुल मिलाकर निर्णय ये लिया गया  जो ग्रह महादशा  नाथ से सम्बन्धित हो ओर अच्छे भावो का कार्येश हो तो उसी का रत्न धारण करे निश्चय ही आपको उसके सकारत्मक परिणाम मिलेंगे ।क्योकी परिणाम सभी ग्रह देते है मगर अपनी अपनी भुक्ति,अन्तरा  में  लेकिन मुख्य परिणाम महादशा नाथ पर निर्भर करता है । कुछ लोग कुंडली मे ग्रह की स्थितियों पर विचार करते है ओर रत्न धारण करा देते है लेकिन इस ग्रह का महादशा नाथ से कोई संबंद्ध नही है तो परिणाम नही मिलेगा फिर हम कहते है की रत्न से कुछ नही होता ये तो पत्थर है,ये पत्थर नही है 100% परिणाम देते है बस इनका चयनकर्ता सही ओर अनुभवी ज्योतिषी होना चाहिए।।